दुनिया में बढ़ते तनाव और डर के माहौल में सोना फिर से सबसे बड़ा सहारा बनकर उभरा है। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत इतिहास रचते हुए 5,000 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तो बस शुरुआत है और आने वाले महीनों में सोना 6,000 डॉलर तक पहुंच सकता है।
जंग जैसे हालात, राजनीतिक खींचतान और आर्थिक अस्थिरता ने निवेशकों को शेयर बाजार से दूर कर दिया है। ऐसे समय में लोग तेजी से सोने की शरण में जा रहे हैं। इस साल अब तक सोना 17 फीसदी चढ़ चुका है, जबकि 2025 में इसकी कीमत में 64 फीसदी की जबरदस्त उछाल देखा गया था।
लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन के ताज़ा सर्वे में विश्लेषकों ने सोने का भविष्य और भी चमकदार बताया है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में सोने का भाव 7,150 डॉलर तक भी जा सकता है। वहीं, दिग्गज निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स ने 2026 के अंत तक सोने का अनुमान 5,400 डॉलर कर दिया है।
Societe Generale के एनालिस्ट्स का कहना है कि साल के अंत तक सोना 6,000 डॉलर तक जा सकता है, जबकि Morgan Stanley ने बुल केस में 5,700 डॉलर का टारगेट दिया है।
स्वतंत्र विश्लेषक रॉस नॉर्मन कहते हैं, “आज की दुनिया में एक ही चीज़ पक्की है, वो है अनिश्चितता। और यही अनिश्चितता सोने को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है।”
अमेरिका और नाटो के बीच तनाव, व्यापार शुल्क को लेकर असमंजस और अमेरिकी केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता पर उठते सवाल- इन सबने बाजार की नींद उड़ा दी है। अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों से भी राजनीतिक बेचैनी और बढ़ने की आशंका है।
सोने की इस तेजी के पीछे केंद्रीय बैंकों की भारी खरीद बड़ी वजह है। गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक, उभरते देश हर महीने औसतन 60 टन सोना खरीद रहे हैं। पोलैंड अपने सोने का भंडार 700 टन तक बढ़ाने की तैयारी में है, जबकि चीन लगातार 14 महीने से सोना खरीद रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश अब डॉलर से दूरी बनाकर सोने की ओर झुक रहे हैं।
सोने से जुड़े ETF में भी पैसा उमड़ पड़ा है। 2025 में गोल्ड ETF में 89 अरब डॉलर का रिकॉर्ड निवेश हुआ। ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद ने सोने की चमक और बढ़ा दी है।
ऊंचे दामों ने गहनों की मांग जरूर घटाई है, लेकिन भारत और यूरोप में लोग सोने के सिक्के और छोटी ईंटें खरीदने में पीछे नहीं हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर सोने की कीमत में थोड़ी गिरावट आती भी है, तो वह खरीदारी का मौका बनेगी। सोने में बड़ी गिरावट तभी संभव है, जब दुनिया में शांति और आर्थिक स्थिरता लौटे- जो फिलहाल दूर की बात लगती है। आज की जटिल दुनिया में सोना इसलिए पसंद किया जा रहा है, क्योंकि इसमें न कंपनी का जोखिम है, न देश का- बस भरोसा है, चमक है और सुरक्षित ठिकाना है। (रॉयटर्स के इनपुट के साथ)