facebookmetapixel
Advertisement
अगस्त में निवेशकों को नहीं पसंद आया डेट फंड्स? निकाले ₹8127 करोड़, कहीं ओवरनाइट फंड्स तो वजह नहीं?SEBI चेयरमैन बोले: क्लोजिंग ऑक्शन सेशन नहीं होगा बंद, लिक्विडिटी की समस्या पर निकलेगा अस्थायी रास्ताकच्चे तेल में उबाल के बावजूद शेयर बाजार में बहार, 3 दिन बाद सेंसेक्स-निफ्टी ने पकड़ी रफ्तारकच्चा तेल $100 के पार: क्या फिर महंगा होगा पेट्रोल-डीजल? भारत और बाजार पर कितना बड़ा खतराHDFC Bank को क्रेडिट सुइस के AT1 बॉन्ड मामले में बड़ी राहत, बहरीन की अदालत ने सभी 7 दावे खारिज किएअगस्त में थोक महंगाई घटने का अनुमान, फिर भी बढ़ सकती है खाद्य महंगाई; यूनियन बैंक की रिपोर्ट में दावाPSU शेयर में कमाई का मौका! 44% तक मिल सकता है रिटर्न, ब्रोकरेज ने दी BUY रेटिंगSU-57 फाइटर जेट, रूसी तेल से लेकर परमाणु उर्जा तक, मोदी-पुतिन की मुलाकात में किन-किन बातों पर चर्चा संभव?मिडकैप फंड्स पर निवेशकों का भरोसा कायम, अगस्त में इनफ्लो 13% बढ़ा, AUM ₹5.43 लाख करोड़ पहुंचाBRICS Summit 2026: युद्ध के बीच भारत आ रहे ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, जानें क्या है एजेंडा

Gold Investment: सोने में रिटर्न ने 20 साल की अवधि में शेयरों व रियल एस्टेट को मात दी

Advertisement

लंबी अवधि में सोने का सालाना रिटर्न 15%, शेयर और प्रॉपर्टी से ज्यादा; मिड और स्मॉलकैप शेयरों का भी बेहतर प्रदर्शन

Last Updated- December 12, 2025 | 8:43 AM IST
Gold investment

फंड्सइंडिया ने एक नोट में कहा है कि लंबी अवधि में सालाना चक्रवृद्धि प्रतिफल के मामले में सोने में निवेश ने अधिकांश परिसंपत्ति वर्गों को पीछे छोड़ दिया है। जहां भारतीय शेयरों ने 20 वर्षों में 13.5 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि के हिसाब से प्रतिफल दिया (निफ्टी 50 कुल प्रतिफल सूचकांक-टीआरआई-के अनुसार), वहीं इस दौरान रुपये के लिहाज से सोने में 15 फीसदी की वृद्धि हुई।

फंड्सइंडिया के अध्ययन के अनुसार 7.8 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि के साथ रियल एस्टेट और 7.6 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि के साथ डेट इस पिरामिड के निचले पायदान पर थे। आंकड़ों से पता चलता है कि रुपये के लिहाज से भारतीय इक्विटी से 20 वर्षों में 13.5 फीसदी का सालाना चक्रवृद्धि रिटर्न मिला जबकि अमेरिकी इक्विटी का रुपये के संदर्भ में रिटर्न 14.8 फीसदी रहा। इस बीच, नोट में कहा गया है कि अचल संपत्ति से होने वाले रिटर्न की गणना एनएचबी रेसिडेक्स के आधार पर की गई है (दिसंबर 2002 से दिसंबर 2008 तक की अवधि के रिटर्न को 5 शहरों के लिए और दिसंबर 2008 के बाद सितंबर 2025 तक 15 शहरों के लिए माना गया है) और इसे सितंबर 2025 तक अपडेट किया गया है।

इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक और अनुसंधान प्रमुख जी चोकालिंगम ने कहा, सोने की मांग में वृद्धि का मुख्य कारण दुनिया भर में केंद्रीय बैंकों की खरीदारी है। इससे कीमतें ऊपर की ओर बनी रहीं। उन्होंने कहा, इसके अलावा पिछले कुछ वर्षों में केंद्रीय बैंक की आक्रामक नीतियों, भू-राजनीतिक चिंताओं, रुपये के अवमूल्यन और शेयरों के महंगे भाव के के बीच खुदरा निवेशकों के लिए सोने में सुरक्षित निवेश का आकर्षण कभी कम नहीं हुआ।

फंड्सइंडिया की रिपोर्ट के अनुसार 5 साल की छोटी अवधि में सोने से प्राप्त सालाना चक्रवृद्धि रिटर्न 23.2 फीसदी रहा जो भारतीय इक्विटी के 16.5 फीसदी और अमेरिकी इक्विटी के 19.6 फीसदी रिटर्न की तुलना में कहीं बेहतर है। शानदार रिटर्न के बावजूद विशेषज्ञ आने वाले वर्ष में सोने की कीमतों में और अधिक वृद्धि की संभावना देख रहे हैं। उनका मानना है कि भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूत मांग से कीमतों में बढ़ोतरी होगी। उनका मानना है कि सोने की कीमत में वृद्धि को बढ़ावा देने वाले अन्य कारकों में खनन में चुनौतियां, उत्पादन की सीमा और अंततः मांग अधिक रहने पर आपूर्ति पर पड़ने वाला प्रभाव शामिल है।

ब्रिटेन की दि गोल्ड बुलियन कंपनी के प्रबंध निदेशक रिक कांडा ने कहा, अनुमान लगाया जा रहा है कि 2026 के अंत तक सोने की कीमत 5,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीद जारी रखने की उम्मीद है, जो सोने को 5,000 डॉलर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। सोने की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि जारी रहेगी, खासकर अगर मौजूदा मुद्रास्फीति और अनिश्चितता का दौर बना रहता है।

मिड और स्मॉलकैप का उम्दा प्रदर्शन

फंड्सइंडिया की रिपोर्ट के अनुसार इक्विटी सेगमेंट में मिडकैप और स्मॉलकैप से 20 वर्षीय सीएजीआर रिटर्न क्रमशः 16.5 फीसदी (निफ्टी मिडकैप 150 टीआरआई) और 14.3 फीसदी (निफ्टी स्मॉलकैप 250 टीआरआई) रहा जो लार्जकैप (निफ्टी 100 टीआरआई) के 13.8 फीसदी से ज्यादा था।

चोकालिंगम ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में भारतीय खुदरा निवेशकों के निवेश करने के तरीके में संरचनात्मक बदलाव आया है, जिसमें अधिकांश निवेशक जल्दी मुनाफा कमाने के लिए मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट को प्राथमिकता दे रहे हैं। चोकालिंगम ने कहा, 10 साल पहले खुदरा निवेशकों की संख्या लगभग 6 से 6.5 करोड़ थी जो अब बढ़कर 20 करोड़ से अधिक हो गई है।

Advertisement
First Published - December 12, 2025 | 8:40 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement