facebookmetapixel
अमेरिका का सख्त कदम, 13 देशों के लिए $15,000 तक का वीजा बॉन्ड जरूरीवेनेजुएला के तेल उद्योग पर अमेरिका की नजर: ट्रंप बोले- अमेरिकी कंपनियों को मिल सकती है सब्सिडीस्टॉक स्प्लिट का ऐलान: इस रियल्टी कंपनी के शेयर 15 जनवरी से होंगे स्प्लिट, जानें डिटेलStock Market Today: वेनेजुएला संकट के बीच एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख, जानें कैसी होगी शेयर बाजार की शुरुआतStocks To Watch Today: ONGC से Adani Power तक, आज बाजार में इन स्टॉक्स पर रहेगी नजरमजबूत फंडामेंटल के साथ शेयर बाजार में बढ़त की उम्मीद, BFSI क्षेत्र सबसे आगे: रमेश मंत्रीअमेरिकी प्रतिबंधों से वेनेजुएला की तेल अर्थव्यवस्था झुलसी, निर्यात पर गहरा असर; भारत का आयात भी घटाबांग्लादेश ने IPL के प्रसारण पर लगाया प्रतिबंध, एक्सपर्ट बोले: इस फैसले से कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगादिल्ली दंगा साजिश केस में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकारGrok विवाद में X को सरकार ने दी 72 घंटे की और मोहलत, महिलाओं व बच्चों की तस्वीरों पर केंद्र सख्त

Gold ETF में निवेश बढ़ने की उम्मीद, LTCG टैक्स के फायदे और मजबूत आउटलुक का असर

बजट में घो​षित नए कर नियमों के अनुसार गोल्ड ईटीएफ से एक साल में होने वाले लाभ उस पर 12.5 प्रतिशत का एलटीसीजी कर लगेगा।

Last Updated- September 20, 2024 | 10:35 PM IST
Gold

हाल के महीनों में शानदार उछाल दर्ज करने वाले 37,390 करोड़ रुपये के गोल्ड ईटीएफ में निवेश और बढ़ने की संभावना है। इसकी वजह इस धातु के लिए मजबूत परिदृश्य के बीच दीर्घाव​धि पूंजीगत लाभ कर (एलटीसीजी) के फायदे मिलना है। इससे म्युचुअल फंड (एमएफ) की पेशकशों में ‘स्मार्ट’ मनी आ रहा है।

‘स्मार्ट’ मनी को मौके की तलाश वाले पूंजी निवेश के तौर पर भी जाना जाता है। यह ऐसा रणनीतिक निवेश होता है जो आमतौर पर अल्पाव​धि के लिए आता है। प्लान अहेड वेल्थ एडवायजर्स के संस्थापक और मुख्य कार्या​धिकारी विशाल धवन ने कहा, ‘छोटी अवधि के कारण गोल्ड ईटीएफ उन निवेशकों के लिए ज्यादा बेहतर हो गया है जो कम समय के लिए खरीदारी और बिक्री की संभावना तलाशते हैं।’

बजट में घो​षित नए कर नियमों के अनुसार गोल्ड ईटीएफ से एक साल में होने वाले लाभ उस पर 12.5 प्रतिशत का एलटीसीजी कर लगेगा। अप्रैल 2023 में हटाए जाने के बाद एलटीसीजी लाभ इस साल फिर से दिया गया है। हालांकि इस बार एलटीसीजी के लिए हो​ल्डिंग अव​धि 3 साल की अनिवार्यता से काफी कम है जो मार्च 23 तक लागू थी।

निप्पॉन इंडिया म्युचुअल फंड में कमोडिटी प्रमुख और फंड प्रबंधक विक्रम धवन ने कहा, ‘हाल के महीनों में निवेश बढ़ा है लेकिन यह पारंपरिक स्वर्ण बाजार का मजह छोटा सा हिस्सा है। पारंपरिक बाजार लगभग 3-4 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। फंडों के रास्ते और कर ढांचे में बदलाव और सकारात्मक परिदृश्य से भविष्य में ईटीएफ में ज्याद निवेश की संभावना है।’

अगस्त में गोल्ड ईटीएफ में निवेश बढ़कर 1,611 करोड़ रुपये की सर्वा​धिक ऊंचाई पर पहुंच गया। विश्लेषकों का कहना है कि रिटेल निवेश का प्रवाह भी तेज हो सकता है, लेकिन यह इस पर निर्भर करेगा कि सरकार सॉवरिन गोल्ड बॉन्डों (एसजीबी) बंद करती है या नहीं। उनका कहना है कि एसजीबी पर मिलने वाला अतिरिक्त ब्याज उन्हें ईटीएफ के मुकाबले ज्यादा आकर्षक विकल्प बनाता है।

आनंद राठी वेल्थ में उप मुख्य कार्या​धिकारी फिरोज अजीज ने कहा, ‘जहां गोल्ड ईटीएफ 12 महीने की अपनी सं​क्षिप्त एलटीसीजी हो​ल्डिंग अव​धि की वजह से आकर्षक लग सकते हैं, वहीं एसजीबी अब भी कई निवेशकों के लिए पसंदीदा विकल्प बने हुए हैं। एसजीबी सोने की कीमतों में संभावित वृद्धि का न सिर्फ लाभ मुहैया कराते हैं ब​ल्कि 2.5 प्रतिशत सालाना ब्याज और परिपक्वता पर पूंजीगत लाभ पर कर छूट भी प्रदान करते हैं।’

धवन ने कहा कि निवेशकों को अल्पावधि के नजरिए से सोने में निवेश करने के लिए एलटीसीजी कराधान की कम होल्डिंग अवधि से प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘परिसंप​त्ति वर्ग के तौर पर सोने में उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए 1 वर्ष या 2 वर्ष की समय-सीमा ठीक नहीं है। यह दीर्घाव​धि के लिए है।’ एक साल की एलटीसीजी हो​​ल्डिंग अवधि सिर्फ गोल्ड ईटीएफ के लिए लागू है क्योंकि गोल्ड फंड ऑफ फंड्स (एफओएफ) दो वर्ष बाद ही कराधान के पात्र होंगे।

रुपी विद रुषभ के संस्थापक ऋषभ देसाई ने कहा कि कर के लिहाज से अच्छा न होने के बावजूद खुदरा निवेशकों को एफओएफ विकल्प को प्राथमिकता देनी चाहिए।

देसाई ने कहा, ‘चूंकि ईटीएफ का कारोबार एक्सचेंजों पर होता है। इसलिए गोल्ड ईटीएफ खुदरा निवेशकों के लिए सही विकल्प नहीं हो सकता है, क्योंकि कीमतें मांग-आपूर्ति के समीकरण से जुड़ी हैं। ऊंची मांग इन यूनिट की कीमतें संबं​धित परिसंप​त्तियों की वैल्यू से ऊपर पहुंचा सकती है। कभी कभी इनकी कीमत कम भी हो सकती है, जिससे बाहर निकलने वाले निवेशकों को नुकसान हो सकता है। फंड ऑफ फंड्स (एफओएफ) इस जोखिम से कम प्रभावित होते हैं।’

First Published - September 20, 2024 | 10:20 PM IST

संबंधित पोस्ट