facebookmetapixel
Advertisement
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत पहुंचे, पीएम मोदी को दिया व्हाइट हाउस आने का न्योताCorporate Actions Next Week: डिविडेंड-स्प्लिट-बोनस की होगी बारिश, निवेशकों की चमकेगी किस्मतBonus Stocks: अगले हफ्ते इन 2 कंपनियों के निवेशकों की लगेगी लॉटरी, फ्री में मिलेंगे शेयरअगले हफ्ते TCS, ITC और बजाज ऑटो समेत 23 कंपनियां बाटेंगी मुनाफा, एक शेयर पर ₹150 तक कमाई का मौकाUpcoming Stock Split: अगले हफ्ते ये 2 कंपनियां बांटने जा रही हैं अपने शेयर, छोटे निवेशकों को होगा फायदाईरान पर बड़े हमले की तैयारी में ट्रंप, रिपोर्ट में दावा: वार्ता विफल होने से नाखुश, बेटे की शादी में भी नहीं जाएंगेओडिशा सरकार का बड़ा फैसला: सरकारी विभागों में अब सिर्फ EV की होगी खरीद, 1 जून से नया नियम लागूPower Sector में धमाका: भारत में बिछेगी दुनिया की सबसे ताकतवर 1150 KV की बिजली लाइन, चीन छूटेगा पीछेकच्चे तेल की महंगाई से बिगड़ी इंडियन ऑयल की सेहत, कंपनी पर नकदी पर मंडराया संकटApple का नया दांव: भारत को बना रहा एयरपॉड्स का नया हब, चीन और वियतनाम की हिस्सेदारी घटी

Delhi Bullion Market: सोना 372 रुपये टूटकर 55,000 के नीचे उतरा, चांदी स्थिर

Advertisement
Last Updated- December 25, 2022 | 10:11 AM IST
Gold

वैश्विक बाजारों में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में कमजोरी का रुख होने के बीच दिल्ली सराफा बाजार में शुक्रवार को सोना 372 रुपये गिरकर 54,853 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने यह जानकारी दी। इससे पिछले सत्र में सोने का भाव 55,225 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। हालांकि, चांदी की कीमत 15 रुपये की मामूली बढ़त के साथ 69,273 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई जो पिछले सत्र में 69,258 रुपये प्रति किलो पर रही थी।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, ‘दिल्ली में सोने (24 कैरेट) की हाजिर कीमत 372 रुपये की गिरावट के साथ 54,853 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई।’ अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना गिरावट के साथ 1,797.8 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। वहीं चांदी की कीमत 23.74 डॉलर प्रति औंस पर लगभग अपरिवर्तित रही।

यह भी पढ़ें: कृषि जिंस कारोबार पर एक साल और पाबंदी

परमार ने कहा, ‘अमेरिका में तीसरे तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आंकड़े उम्मीद से कहीं बेहतर आने के बाद सोने की कीमतों में गिरावट आई। अमेरिका के आर्थिक आंकड़े बताते हैं कि वहां की अर्थव्यवस्था में, पहले के अनुमान से कहीं अधिक तेजी लौटी है। इससे डॉलर मजबूत हुआ और इसने फेडरल रिजर्व को मुद्रास्फीति के खिलाफ संघर्ष को आक्रामक बनाए रखने का मौका दिया है।’

 

Advertisement
First Published - December 23, 2022 | 6:39 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement