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Cumin prices : जीरे की कीमतों में हुई रिकॉर्ड उठापटक

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नई फसल की बोआई के कुछ सप्ताह बाद जीरे के दाम तेजी से गिरने का किसानों के रुझान पर असर पड़ सकता है।

Last Updated- November 09, 2023 | 11:22 PM IST
jeera bhav today
Representative Image

Cumin prices : नैशनल कमोडिटी ऐंड डेरिवेटिव एक्सचेंज में सितंबर के दौरान जीरे के दाम 65,900 रुपये प्रति क्विंटल की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए थे। लेकिन इस महीने की शुरुआत में गिरकर छह महीने के निचले स्तर 39,630 पर आ गए थे। कुछ दिन पहले करीब 45,000 पर स्थिर हो गए थे। ऐसा कारोबारियों के निवेश और पूर्वानुमान में बदलाव के कारण हुआ था।

नई फसल की बोआई के कुछ सप्ताह बाद जीरे के दाम तेजी से गिरने का किसानों के रुझान पर असर पड़ सकता है। इस साल बोआई में देरी हुई है। इसका कारण यह है कि जीरे के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में तापमान सामान्य से अधिक रहा और खेती की लागत भी बढ़ी।

अभी ऊंझा के हाजिर बाजारों में भी जीरे के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं। इससे भविष्य के दाम की कुछ झलक सामने आती है। लेकिन इस पर कुछ छूट भी है। जीरे की बोआई 15-20 अक्टूबर के बीच होती है और इसकी कटाई मार्च में शुरू होती है।

कारोबारियों के अनुसार इस साल अभी तक गुजरात के कच्छ क्षेत्र में जीरे की बोआई 60 फीसदी से भी कम क्षेत्र में हुई है और जीरे की बोआई का प्रमुख क्षेत्र भी कच्छ है। कुछ किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ हफ्तों में तापमान अनुकूल नहीं रहता है तो वे सौंफ लगा सकते हैं।

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सौंफ की खेती करनी आसान है। कारोबारी सूत्रों के अनुसार भारत में जीरे का उत्पादन इस सत्र में 2.5 लाख से 2.75 टन हुआ था जबकि कुछ साल पहले तक 3.10 लाख से 4.50 लाख टन था। हालांकि कारोबारियों से कहीं अधिक सरकार के अनुमान थे।

किसानों के मुताबिक बोआई के दौरान तापमान अधिक रहा था। गर्मी के कारण अंकुरण पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इसलिए किसानों ने व्यापक स्तर पर जीरे की बोआई नहीं की। कच्छ के किसान ने बताया, ‘बीते साल कई किसानों ने फसल लगाई थी लेकिन तापमान अधिक होने के कारण नुकसान झेलना पड़ा था। इसलिए इस साल किसान अनुकूल परिस्थितियों का इंतजार कर रहे हैं।’

आमतौर पर कच्छ क्षेत्र में इस समय तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस होता है लेकिन इस साल यह 37-38 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं आया। अहीर ने बताया कि इसके अलावा बोआई के दौरान जीरे के बीज के दाम अत्यधिक बढ़ जाने के कारण लागत भी बढ़ गई।

उन्होंने बताया, ‘पहले बोआई के लिए जीरे के अच्छे बीज 500 रुपये किलोग्राम के ईद-गिर्द केंद्रित थे लेकिन इस साल यह 1000 रुपये प्रति किलोग्राम पर भी उपलब्ध नहीं हैं।’ एक एकड़ में बोआई के लिए पांच किलोग्राम जीरे के बीज की जरूरत होती है। इसके अलावा किसानों को शुरुआती दौर में डि अमोनियम सल्फेट का छिड़काव करना पड़ता है। इसकी कीमत 1,350 रुपये प्रति बोरी (एक बोरी में 50 किलो) आती है।

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इस साल प्रति एकड़ जीरे की बोआई की कीमत 12,000-13,000 रुपये हो गई है जबकि यह बीते साल 6,000 से 7,000 रुपये थी। जीरे की तुलना में सौंफ की बोआई की लागत 5,000 से 5,500 रुपये प्रति एकड़ है और इस पर तापमान का खास असर नहीं पड़ता है।

सिल्क रुट डॉट एजी के वैश्विक कमोडिटी व ट्रेड के विशेषज्ञ तरुण सत्संगी ने कहा कि कम या अधिक दाम होने से आमतौर प्रतिकूल असर डालते हैं। दाम कम होने पर आपूर्ति कम होती है और दाम अधिक होने पर मांग पर प्रतिकूल असर पड़ता है।

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First Published - November 9, 2023 | 11:06 PM IST

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