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अमेरिकी मांग में कमी से फिसला कच्चा तेल

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Last Updated- December 07, 2022 | 11:43 AM IST

अमेरिका की आर्थिक मंदी से मांग में आई कमी के कारण कच्चे तेल की कीमतों में कल आई कमी 18 सालों में एक दिन में हुई सबसे बड़ी गिरावट थी।


हालांकि आज इसमें थोड़ा बदलाव देखा गया और इसका कारोबार लगभग 139 डॉलर प्रति बैरल की कीमत पर किया जा रहा था। फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष बेन एस बर्नान्के ने कहा कि विकास और महंगाई संबंधी जोखिमों में इजाफा हुआ है।

इसका प्रभाव कच्चे तेल की कीमतों पर स्पष्ट देखा गया। 17 जनवरी 1991 के बाद तेल के डॉलर वाले मूल्य में कल सबसे बड़ी गिरावट आई जो प्रतिशत के तौर पर आई अब तक की सबसे अधिक कमी है। मास्टरकार्ड इंक द्वारा कल प्रदर्शित किए गए रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में गैसोलिन की मांग में पिछले सप्ताह 5.2 प्रतिशत की कमी आई है। 12 सप्ताहों से मांग में गिरावट का दौर चल रहा है। टोक्यो स्थित मित्सुबिशी कॉर्प में जोखिम प्रबंधन के सहायक महाप्रबंधक एंथोनी नुनैन ने कहा, ‘अगर अमेरिका में आर्थिक मंदी आती है तो इसका प्रभाव वैश्विक हो सकता है, चिंता की बात यही है।’

उन्होंने कहा, ‘जब तक कि भंडार या आपूर्ति में जबर्दस्त इजाफा नहीं होता है तब तक तेल की कीमतों में आई यह गिरावट अस्थाई हो सकती है क्योंकि विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की मांग अभी भी मजबूत है।’ न्यू यॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज पर अगस्त डिलीवरी वाले कच्चे तेल की कीमत में 0.3 प्रतिशत की बढ़त देखी गई और इसका कारोबार 139.08 उॉलर पर किया जा रहा था। 11 जुलाई को कच्चे तेल का वायदा मूल्य रेकार्ड 147.27 बैरल पर पहुंच गया था। पिछले साल के मुकाबले में इसमें 87 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

कल दिन के 10.30 बजे (न्यू यॉर्क ) कच्चे तेल का कारोबार 144 डॉलर प्रति बैरल की दर पर किया जा रहा था और 11 बजे कीमत 9.26 डॉलर घट कर 135.92 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गई। कारोबार के बंद होते समय तक इसमें 44.4 प्रतिशत या 6.44 डॉलर की गिरावट आई। कीमत प्रति बैरल 138.74 डॉलर रही। कनेक्टिकट, स्टैमफोर्ड स्थित टीएफएस एनर्जी एलएलएस के मार्केट रिसर्च के निदेशक एडिसन आर्मस्ट्रॉन्ग ने कहा, ‘जब इसका कारोबार 140 डॉलर प्रति बैरल से नीचे होने लगा तो भारी बिकवाली का दौर शुरु हो गया।

बाजार में कच्चे तेल का कारोबार 140 डॉलर से अधिक पर किया जा रहा था, जब कारोबार इस स्तर से नीचे किया जाने लगा तो कीमत में एक मिनट के अंदर दो डॉलर की गिरावट आई।’ पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक), जो वैश्विक  तेल के लगभग 40 प्रतिशत की आपूर्ति करते हैं, ने अमेरिका के परिवहन ईंधन की मांग में कमी को देखते हुए साल 2008 में छह महीने की अवधि के लिए तेल की वैश्विक मांग की भविष्यवाणी में कमी की आने बात कही है। यह भी कहा गया है कि साल 2009 में कच्चे तेल की मांग में और कमी आएगी क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ रहा है।

ओपेक की सतर्कता

मित्सुबिशी के नुनैन ने कहा, ‘ओपेक भी उत्पादन या क्षमताओं को बढ़ाने को लेकर सतर्क है क्योंकि उन्हें लगता है कि मांग उस हिसाब से नहीं होगी।’तेल बाजार की अपनी मासिक रिपोर्ट में समूह ने कल बताया कि अगले साल ओपेक के कच्चे तेल की मांग प्रति दिन 312 लाख बैरल की होगी जो साल 2008 की भविष्यवाणी से 7,10,000 बैरल कम है। कल न्यू यॉर्क में गैसोलिन का वायदा मूल्य 4.9 प्रतिशत घट कर 3.3848 डॉलर प्रति गैलन के स्तर पर आ गया। सिंगापुर में इसकी कीमत 3.3775 डॉलर रही।

ब्राजील की तेल कंपनी पेट्रोबास के यह कहने के बाद कि 14 जुलाई को शुरु हुई हड़ताल के बाद वह कंपोस बेसिन में सामान्य उत्पादन की शुरुआत करेगी, तेल की कीमतों में गिरावट आई। रॉयल डच शेल पीएलसी जो यूरोप की सबसे बड़ी तेल कंपनी है, ने नाइजीरियाई बॉनी लाइट क्रूड के निर्यात पर ‘फोर्स मैज्योर’ समाप्त कर दिया। फोर्स मैज्योर एक कानूनी शर्त है जो उत्पादकों को वैसी परिस्थिति में डिलीवरी नहीं कर पाने की इजाजत देती है जब परिस्थितियां उनकी नियंत्रण से बाहर हो।

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First Published - July 16, 2008 | 11:18 PM IST

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