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ऊंचाई से फिसलता जा रहा है कच्चा तेल

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Last Updated- December 07, 2022 | 12:00 PM IST

कच्चे तेल की कीमत में लगातार तीसरे दिन कमी दर्ज की गई और यह 134 डॉलर प्रति बैरल के नीचे चली गई।


न्यू यॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज में गुरुवार को कच्चे तेल की अगस्त डिलीवरी के भाव में 0.9 फीसदी यानी 1.20 डॉलर की गिरावट हुई और यह 133.40 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गयी। पिछले हफ्ते कीमतों का रेकॉर्ड बनाने के बाद महज हफ्ते भर में ही कच्चे तेल में 13 डॉलर की कमी हो चुकी है।

तेल की कीमतों में कमी होने की मुख्य वजह आपूर्ति में बढ़ोतरी होना बताया जा रहा है। इसके अलावा, चीन की आर्थिक विकास दर में गिरावट आने से कच्चे तेल की मांग में कमी होने के कयास लगाए जा रहे हैं। जानकारों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2008-09 की पहली तिमाही के लिए चीन की आर्थिक विकास दर के परिणाम आने के बाद इस अनुमान को बल मिला है कि इस साल पूरी दुनिया की आर्थिक विकास दर कम रहेगी। इसे तेल की खपत में कमी होने का संकेत माना जा रहा है।

साथ ही संयुक्त राज्य के तेल भंडार में अनुमान से कहीं ज्यादा वृद्धि हुई है जिससे तेल की मांग पर असर पड़ा है। ईरान और अमेरिका के तनावों में कमी आने का भी तेल की कीमत पर असर पड़ा है। बुधवार को अमेरिकी ऊर्जा विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले हफ्ते कच्चे तेल की आपूर्ति 29.5 लाख बैरल से बढ़कर 29.69 करोड़ बैरल हो गयी है। अमेरिका की बात करें तो पिछले 4 हफ्तों से कच्चे तेल की रोजाना औसत मांग 2.03 करोड़ बैरल बनी हुई है।

आंकड़ों के अनुसार, तेल की कीमतें बढ़ने की वजह से 2007 के बाद कच्चे तेल की रोजाना खपत में 2 फीसदी की कमी हुई है। जापान के एक विश्लेषक का कहना है कि कच्चे तेल के बाजार में पिछले हफ्ते के बनिस्बत इस समय मंदड़िये थोड़ा हावी हो गए हैं। एमएफ ग्लोबल लिमिटेड, लंदन के एक ब्रोकर ने मांग में कमी आने पर कहा कि इससे साफ संकेत मिलता है कि कच्चे तेल की औद्योगिक खपत के साथ-साथ व्यक्तिगत खपत में भी कमी हुई है।

न्यू यॉर्क में अगस्त अनुबंध के कच्चे तेल का भाव आज 133.40 डॉलर रहा जो ठीक साल भर पहले की तुलना में 81 फीसदी ज्यादा है। गौरतलब है कि बुधवार को कच्चे तेल कीमत में 3 फीसदी यानी 4.14 डॉलर प्रति बैरल की कमी हुई थी और 134.60 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था।

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First Published - July 17, 2008 | 11:48 PM IST

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