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Cold Chain Project: कोल्ड चेन प्रोजेक्ट के बजट खर्च में सुस्ती, 25% परियोजनाएं अधूरी

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Cold Chain Project: बीते 5 सालों में किसी भी साल पूरा खर्च नहीं हुआ आवंटित बजट, 404 में से 300 परियाेजनाएं ही हुई पूरी, जबकि 100 से ज्यादा परियोजनाएं अधूरी

Last Updated- December 05, 2025 | 7:37 PM IST
cold storage
Photo: Freepik

Cold Chain Project: कोल्ड चेन परियोजनाओं के आंवटित राशि पूरी खर्च नहीं हो पा रही है। जिसका असर मंजूर परियोजनाओं के पूरे होने पर भी पड़ रहा है। केंद्र सरकार प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY) के तहत कोल्ड चेन अवसंरचना को विस्तार देने के लिए योजना चला रही है। इस योजना का उद्देश्य फार्म गेट यानी किसान के खेत से उपभोक्ता तक बिना किसी बाधा के एकीकृत कोल्ड चेन और वैल्यू एडिशन अवसंरचना विकसित करना है ताकि पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान को कम किया जा सके। योजना के तहत देश भर में पैक हाउस, रीफर वैन, रिपेनिंग चैंबर, कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।

कोल्ड चेन परियोजनाओं के लिए बजटीय आवंटन का खर्च

बीते 5 साल के दौरान कोल्ड चेन योजना के तहत किसी भी साल बजटीय आवंटन की राशि पूरी खर्च नहीं हो पाई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2021-22 में इस योजना के तहत 227.6 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, लेकिन खर्च 225.31 करोड़ रुपये ही हुए। हालांकि उक्त वर्ष में तो फिर भी खर्च ठीक ही रहा। लेकिन इसके बाद वाले वर्षों में खर्च में काफी कमी देखी गई जैसे 2022-23 में आवंटित 230.5 करोड़ रुपये में से 203.07 करोड़ रुपये, वर्ष 2023-24 में 196.5 करोड़ रुपये में से 175.4 करोड़ रुपये, वर्ष 2024-25 में 179.8 करोड़ रुपये में से काफी कम 113.52 करोड़ रुपये ही खर्च हुए।

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चालू वित्त वर्ष के दौरान भी बजटीय आवंटन 171.63 करोड़ रुपये में से पिछले महीने तक 65.43 करोड़ रुपये ही खर्च हुए हैं। खर्च में सुस्ती के कारण हर साल इस योजना का बजटीय आवंटन भी घट रहा है। बीते 5 वर्षों में यह 227.6 करोड़ रुपये से घटकर 171.63 करोड़ रुपये रह गया है।

400 में से 300 कोल्ड चेन परियोजनाएं ही पूरी

बजटीय आवंटन कम खर्च होने का असर कोल्ड चेन परियोजनाओं के पूरे होने पर भी देखा जा रहा है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के मुताबिक इंटीग्रेटेड कोल्ड चेन एंड वैल्यू एडिशन इंफ्रास्ट्रक्चर के तहत कुल 404 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 300 परियोजनाएं ही पूरी हो चुकी हैं। जाहिर है मंजूर परियोजनाओं में से अभी भी 25 फीसदी परियोजनाएं अधूरी हैं।

सबसे ज्यादा 77 परियोजनाएं महाराष्ट्र में मंजूर की गई हैं और इनमें से 58 परियोजनाएं ही पूरी हुई हैं। महाराष्ट्र के बाद 35 परियोजनाएं आंध्र प्रदेश में, उत्तराखंड में 30 परियोजनाएं, गुजरात में 29 परियोजनाएं, पंजाब व तमिलनाडु में 24-24 परियोजनाएं और हरियाणा में 23 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं।

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First Published - December 5, 2025 | 7:23 PM IST

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