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दस महीने का निचला स्तर छूने के बाद तेल में फिर आई तेजी

Last Updated- December 07, 2022 | 11:05 PM IST

ऋण बाजार को राहत देने के लिए अमेरिका, यूरोप और चीन द्वारा ब्याज दरों में की गई कमी के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 10 महीने के निचले स्तर को छूने के बाद एक बार फिर से मजबूती देखने को मिली।


न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज पर नवंबर डिलिवरी वाले कच्चे तेल की कीमतों में 93 सेंट की बढ़त दर्ज की गई और इसका कारोबार 90.99 डॉलर प्रति बैरल पर किया जा रहा था। शुरुआत में इसकी कीमतों में 4.5 फीसदी की गिरावट आई थी और इसका कारोबार लंदन में 12.15 बजे 88.99 डॉलर प्रति बैरल पर किया जा रहा था।

टोक्यो स्थित मित्सुबिशी कॉर्प के अंतरराष्ट्रीय पेट्रोलियम कारोबार के प्रबंधक टोनी नुआन ने कहा कि यह सब मांग की प्रतिकूल स्थिति के वजह से हो रहा है। ऐसा लगता है कि संभलने से पहले अर्थव्यवस्था काफी बदतर होने जा रही है।

डाऊ जोंस के पांच वर्षों के न्यूनतम स्तर पर बंद होने के बाद आज फिर एशियाई बाजार में शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिला। भारी ऋण संकट की आशंका से ऐसी गिरावट आई जो आर्थिक मंदी की तरफ इशारा कर रही है।

बुधवार को शुरुआती कारोबार में जापानी शेयरों में 4.54 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। हांगकांग में तो यह गिरावट 5.1 प्रतिशत की थी। गौरतलब है कि तेल की कीमतें जुलाई में 147 डॉलर प्रति बैरल के उच्चतम स्तर से घटकर सोमवार को आठ महीने के न्यूनतम स्तर पर आ गई थी।

लेकिन ओपेक सदस्य देश लीबिया द्वारा कच्चे तेल उत्पादकों को उत्पादन में कटौती कर सुरक्षित रखने की बात कहे जाने के बाद तेल की कीमतों में थोड़ी तेजी आई। लीबियाई ऊर्जा मंत्री शुकरी घानेम ने कहा कि कीमतों में इस प्रकार की गिरावट से हम काफी चिंतित हैं। सितंबर में ओपेक ने उत्पादन घटा कर 5,20,000 बैरल प्रतिदिन करने का निर्णय लिया था।

अलारॉन ट्रेडिंग के फिल फ्लिन ने ओपेक के उत्पादन में कटौती के प्रभाव को न के बराबर माना है। उन्होंने कहा कि अगर वे उत्पादन में कटौती भी करते हैं तो बाजार इसकी परवाह नहीं करेगा। उनके अनुसार, कुछ दिनों की तेजी के बाद मांग पहले जैसी नहीं रह जाएगी।

ओपेक के सूत्रों के मुताबिक अगर तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आती हैं तो दिसंबर में होने वाली बैठक में यह आपूर्ति कम करने के संदर्भ में विचार करेगा।

First Published - October 8, 2008 | 11:51 PM IST

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