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भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) के अतिरिक्त सचिव हनीफ कुरैशी ने बुधवार को बताया कि तीन और वाहन निर्माता तथा पांच अन्य वाहन कलपुर्जा कंपनियां वित्त वर्ष 2027 से ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत वित्तीय राहत लेना शुरू करेंगी। इससे वित्त वर्ष 2027 के आखिर तक इस स्कीम के तहत प्रोत्साहन पाने वाली कंपनियों की कुल संख्या मौजूदा 10 से बढ़कर 18 हो जाएगी।
ऑटो पीएलआई योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 15 सितंबर, 2021 को मंजूरी दी थी। इसके तहत पांच वर्षों में 25,938 करोड़ रुपये का कुल परिव्यय रखा गया था। योजना में 115 कंपनियों ने आवेदन किया जिनमें से 82 को मंजूरी दी गई थी। इनमें वाहन निर्माता और वाहन कलपुर्जा कंपनियां शामिल थीं।
कुरैशी ने मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा कि सरकार 82 स्वीकृत कंपनियों में से 10 की बैंक गारंटी भुनाएगी, जो पिछले दो वित्त वर्षों में कोई निवेश करने में विफल रहीं। उन्होंने कंपनियों के नाम नहीं बताए, लेकिन कहा कि ये सभी 10 वाहन कलपुर्जा निर्माता हैं। उन्होंने कहा, ‘हरेक कंपनी को इस योजना में शामिल होने के लिए बैंक गारंटी देनी होती है। योजना में बताया गया है कि अगर आपने लगातार दो साल में कोई निवेश नहीं किया है तो आपकी बैंक गारंटी को जब्त किया जा सकता है। लगभग 10 ऐसी कंपनियां हैं जिन्होंने निवेश नहीं किया है। इसलिए, हम उनकी बैंक गारंटी जब्त करेंगे।’
एमएचआई ने योजना के तहत वित्त वर्ष 2024 में महज 2.63 करोड़ रुपये वितरित किए और वित्त वर्ष 2025 में यह आंकड़ा 325.37 करोड़ रुपये रहा। वित्त वर्ष 2026 में मंत्रालय ने पूरे वित्त वर्ष के लिए स्वीकृत 2,091.26 करोड़ रुपये में से करीब 2,000 करोड़ रुपये वितरित किए हैं। कुरैशी ने कहा कि शुरुआती वर्षों में भुगतान कम था क्योंकि स्वीकृत कंपनियां अभी भी विनिर्माण क्षमता लगा रही थीं और 50 फीसदी से ज्यादा डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन (डीवीए) स्थापित कर रही थीं, जो इस योजना में प्रोत्साहन पाने की एक जरूरी शर्त है।
उन्होंने कहा कि अगले वित्त वर्ष में मंजूर इंसेंटिव में कई गुना बढ़ोतरी की उम्मीद है क्योंकि ज्यादा कंपनियां डीवीए-अनुकूल गाड़ियां बेचना शुरू करेंगी और योजना के फायदे लेना शुरू करेंगी।
कुरैशी ने कहा कि वित्त वर्ष 2026 में पांच वाहन निर्माता कंपनियां – महिंद्रा ऐंड महिंद्रा (एमऐंडएम), टाटा मोटर्स, बजाज ऑटो, टीवीएस मोटर और ओला इलेक्ट्रिक तथा चार वाहन कलपुर्जा कंपनियों (डेल्फी-टीवीएस टेक्नोलॉजीज, सोना बीएलडब्ल्यू प्रिसिजन फोर्जिंग्स, बॉश ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया और टाटा ऑटोकॉम्प सिस्टम्स) को इस योजना के तहत वित्तीय रियायत मिली है
या मिलेगी।