मुखर्जी ने कहा, देश भावी जरूरतों के लिए संसाधनों के संरक्षण एवं बड़ी तेजी से बढ़ती जनसंख्या की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के काम के बीच टकराव से जूझ रहा है।
उन्होंने कहा, यही वह उपयुक्त समय है जब हम व्यापक परिप्रेक्ष्य में विकास की अवधारणा पुनर्परिभाषित करें। पर्यावरण हितों एवं विकास जरूरतों के बीच कोई टकराव नहीं होना चाहिए।
राष्ट्रपति पूर्वी सिक्किम जिले के सारामसा में 40 वीं जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय बाल विग्यान, गणित एवं पर्यावरण प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद बोल रहे थे।
मुखर्जी ने कहा कि विश्व की जनसंख्या सात अरब को पार कर गयी है और भारत में विश्व की जनसंख्या का छठा हिस्सा रहता है, ऐसे में यदि उपयुक्त कदम नहीं उठाए गए तो गरीबी, भूख, कुपोषण, अशिक्षा से समस्या गहरा सकती है।
भाषा