कोयला मंत्रालय ने बिजली मंत्रालय को पत्र लिखकर मामले की विस्तार से जांच करने का अनुरोध किया है और इस बारे में टिप्पणी मांगी है।
जेएसपीएल को छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में हसदेव अरंद कोयला खदानों में गार पलमा 4 : 1 कोयला खदान 1996 में आवंटित की गई थी। कंपनी को अपने स्पांजी लौह संयंत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिये यह खदान दिया गया था। खदान में 12.4 करोड़ कोयला भंडार का अनुमान है।
कोयला मंत्रालय ने कहा है ... डीआरआई :डायरेक्ट रिड्यूश्ड आयरन: के विनिर्माण में धुला कोयला इस्तेमाल किया गया और उसके बाद बचे कोयले का इस्तेमाल भी बिजली बनाने के लिये किया गया। खपत के बाद अधिशेष बिजली को अन्यत्र बेच दिया गया। यह निजी इस्तेमाल के लिये आवंटित कोयला खदानों के नियमों का उल्लंघन है।
इस बारे में संपर्क किये जाने पर जेएसपीएल के प्रवक्ता ने कहा, केंद्र तथा राज्य सरकार की नीति के तहत अधिशेष बिजली बेची गयी है।
प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी को कोयला मंत्रालय से इस संदर्भ में अभी कोई नोटिस नहीं मिला है।
भाषा