आर्थिक समीक्षा का स्वरूप और उसका ढांचा हमेशा केंद्रीय बजट से पहले चर्चा का विषय होता है। समीक्षा के लेखक एवं वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने इसकी संरचना पर विस्तार से बात की और इसका भी जिक्र किया है कि यह यह कैसे बदल गई है। इस बार की आर्थिक […]
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आर्थिक समीक्षा में भारत के ऊर्जा क्षेत्र की वृद्धि की राह की 2 प्रमुख बाधाओं को दूर करने पर जोर दिया गया है। इनमें बिजली आपूर्ति में बहुत ज्यादा क्रॉस-सब्सिडी और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं से जुड़ी प्रमुख सामग्री और पूंजी से जुड़ा मसला शामिल है। क्रॉस सब्सिडी के कारण घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को मिलने […]
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आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि नई श्रम संहिता से वर्कफोर्स में लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा और सरल अनुपालन से अर्थव्यवस्था का औपचारिककरण होगा। समीक्षा में कहा गया है कि जिन राज्यों में महिलाओं के श्रम पर सख्त प्रतिबंध हैं, उनकी तुलना में कम प्रतिबंध वाले राज्यों में कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी […]
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भारत अपनी आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) रणनीति में विश्व की आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं के बड़े लैंग्वेज मॉडल का अनुसरण करने के बजाय अर्थव्यवस्था की जमीनी हकीकत पर अनिवार्य रूप से ध्यान दे। यह सुझाव आर्थिक समीक्षा 2025-26 में दिया गया। आर्थिक समीक्षा में डेटा सेंटर क्षमता के विस्तार सहित एआई के आधारभूत ढांचे में जारी त्वरित विकास […]
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आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि भारत में त्वरित भुगतान तंत्र, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) को लंबे समय तक टिकाऊ रखने के लिए जरूरी है कि उसका इस्तेमाल करने वालों को प्रोत्साहन मिले और साथ ही इसके बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और विश्वसनीयता बरकरार रखते हुए इसके जोखिम को कम करने के लिए […]
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आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि अपेक्षाकृत हल्के कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार, संस्थागत निवेशकों के सीमित निवेश, सॉवरिन जोखिम के प्रीमियम और पूंजी प्रवाह पर नियामकीय प्रतिबंधों के कारण देश में पूंजी की अधिक लागत निजी निवेश और दीर्घकालिक विकास में बाधा है। समीक्षा में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि बेहतर […]
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आर्थिक समीक्षा में सुझाव दिया गया है कि सरकार कंपनी अधिनियम के तहत सरकारी कंपनी की परिभाषा में संशोधन करने पर विचार कर सकती है, जो सूचीबद्ध संस्थाओं तक सीमित रहे ताकि ऐसी कंपनियों को न्यूनतम 26 फीसदी सरकारी स्वामित्व के साथ सरकारी कंपनी का दर्जा बनाए रखने की अनुमति मिल सके। साथ ही विनिवेश […]
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बढ़ते राजस्व घाटे और बिना शर्त नकद हस्तांतरण (यूसीटी) के कारण महत्त्वपूर्ण पूंजी निवेश के कम होने के खतरे के बीच राज्य सरकारों को वित्तीय लोकलुभावनवाद पर लगाम कसने के बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है। आर्थिक समीक्षा 2025-26 में चेतावनी दी गई है और देश की सॉवरिन ऋण लागत तथा दीर्घकालिक विकास […]
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आर्थिक समीक्षा 2025-26 में यह बात सामने आई है कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) को संपत्तियों की बिक्री के समान मानने के संकेत और बढ़ती धारणा (विशेष रूप से राज्य स्तर पर) दीर्घकालिक बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं में जोखिम उठाने को तैयार निवेशकों को दूर भगा रही है। समीक्षा में कहा गया है, राज्यों की तुलना […]
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गुरुवार को पेश आर्थिक समीक्षा में चेतावनी दी गई है कि भारत के लिए बाहरी माहौल शायद ‘अस्थिर’और ‘कम मददगार’ रहेगा। इसलिए कि दुनिया भर में व्यापार, निवेश और पूंजी प्रवाह दरअसल व्यापार उदारीकरण को छेड़कर वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में बदलाव से प्रभावित हो रहे हैं। भारत के लिए इसका अर्थ यह है कि निवेश […]
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