अमेरिका और भारत के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर वर्चुअल बातचीत पुन: शुरू हो गई है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक छुट्टियों के दौरान यह वार्ता कुछ समय के लिए थम गई थी। अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘दोनों पक्ष बातचीत कर रहे हैं। मुख्य वार्ताकारों ने छुट्टियों के बाद आभासी संपर्क शुरू कर दिया है।’ उन्होंने कहा कि सीधी बातचीत के लिए समय सीमा अभी तय नहीं की गई है।
व्यापार वार्ता को लेकर पिछली चर्चा दिसंबर में हुई थी। उस समय भारत आए अमेरिकी व्यापारिक दल का नेतृत्व अमेरिकी उप-व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) रिक स्विट्जर कर रहे थे। साल के अंत में अवकाश के कारण वार्ताएं रुक गईं और समझौते के अंतिम रूप को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना रहा।
इस बीच भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर आशावादी बयान दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देश सक्रियता से जुड़े हुए हैं और व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। पूर्व में अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के सहायक के रूप में कार्य कर चुके गोर ने 12 जनवरी को ही नई दिल्ली में भारत में अमेरिका के राजदूत का पदभार संभाला है।
व्यापार समझौते के संबंध में मंगलवार की देर शाम विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बात की। इसमें व्यापार, दुर्लभ खनिज, परमाणु ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा हुई। यह बातचीत गोर के उस बयान के एक दिन बाद हुई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि व्यापार के मुद्दे पर दोनों पक्ष बातचीत करेंगे।
अमेरिकी बयान के अनुसार रुबियो और जयशंकर ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते की वार्ता की प्रगति और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की। इसके साथ दोनों नेताओं ने अमेरिका और भारत की स्वतंत्र और स्वतंत्र हिंद-प्रशांत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। अन्य मुद्दों के अलावा द्विपक्षीय व्यापार समझौता वार्ता को लेकर आगे के कदमों पर चर्चा की। दोनों नेताओं के अगले महीने फिर मिलने की उम्मीद है।
अधिकारी ने कहा कि दोनों देश समय सीमा तय करने की हालत में नहीं हैं, लेकिन वे सौदे को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत जारी रखेंगे। भारत पिछले वर्ष मार्च में अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता शुरू करने वाला पहला देश था, लेकिन छह से अधिक दौर की बातचीत और दोनों देशों के अधिकारियों द्वारा इसके जल्द अंजाम तक पहुंचने की उम्मीद जताने के बावजूद दोनों पक्ष अब तक इस समझौते को अंतिम रूप नहीं दे पाए हैं।
भारत और अमेरिका दो समानांतर मार्गों पर काम कर रहे हैं। एक है व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौता (बीटीए) जिसे पूरा होने में अभी समय लगेगा। दूसरा है अमेरिका के साथ एक ढांचागत व्यापार समझौता, जिसमें भारतीय निर्यातकों पर लगने वाले 50 प्रतिशत जवाबी शुल्क से संबंधित मुद्दों को चिह्नित किया जाएगा।