facebookmetapixel
2030 तक भारत के आसमान पर दो एयरलाइंस का दबदबा, 85% बेड़ा रहेगा शीर्ष कंपनियों के पासपरमाणु ऊर्जा पर बड़ा दांव: शांति अधिनियम से खुले निजी निवेश के दरवाजे, लेकिन चुनौतियां बरकरारडॉनल्ड ट्रंप का वेनेजुएला पर दांव: वॉशिंगटन की दबाव वाली शक्ति की परीक्षानियामक और संस्थानों के बीच सहयोग जरूरी, प्रतिबंध और जुर्माना अंतिम विकल्प: RBI गवर्नर संजय मल्होत्राExplainer: मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला के लोग अब किस हाल में हैं और वहां क्या चल रहा है?Stock Market: लगातार 5वें दिन बाजार धड़ाम, सेंसेक्स-निफ्टी 1% टूटेOscar 2026: ‘कांतारा: चैप्टर 1’ और ‘तन्वी द ग्रेट’ सहित 4 भारतीय फिल्में बेस्ट फिल्म की दौड़ मेंलोन चुकाने के लिए EPF से पैसा निकालने का सोच रहे हैं? पहले ये बातें समझ लें, नहीं तो होगा नुकसानDebt Mutual Funds: दिसंबर में डेट फंड्स को लगा ₹1.32 लाख करोड़ का झटका, जानें क्यों निवेशकों ने निकाले पैसेखाद उत्पादन रिकॉर्ड पर, फिर भी यूरिया आयात क्यों बढ़ा? सरकार और FAI के आंकड़ों में दिखा फर्क

EV की बिक्री को नहीं मिल रही गति

बिज़नेस स्टैंडर्ड के एक विश्लेषण से पता चलता है कि देश में 640 कंपनियां इलेक्ट्रिक वाहन बनाती हैं। लेकिन 345 कंपनियों ने बताया कि उन्होंने 100 से कम गाड़ियां बेची हैं।

Last Updated- September 22, 2023 | 11:22 PM IST
ev

इस महीने की शुरुआत में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गर्व से भारत में फलते-फूलते इलेक्ट्रिक वाहन (EV) विनिर्माण उद्योग के बारे में बताया था।

उन्होंने अब तक 30 लाख इलेक्ट्रिक वाहन बेचने को उपलब्धि करार देते हुए इसमें 600 से अधिक स्टार्टअप कंपनियों की भूमिका पर जोर दिया और उम्मीद जताई कि साल 2030 तक बर साल 1 करोड़ से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री होगी।

देश में शांति से हो रही ईवी क्रांति काफी प्रशंसनीय है मगर आंकड़ों के पीछे की कहानी आशाजनक नहीं है। बिज़नेस स्टैंडर्ड के एक विश्लेषण से पता चलता है कि देश में 640 कंपनियां इलेक्ट्रिक वाहन बनाती हैं। लेकिन 345 कंपनियों ने बताया कि उन्होंने 100 से कम गाड़ियां बेची हैं।

इसके विपरीत, सड़क परिवहन एवं वाहन राजमार्ग मंत्रालय के वाहन डैशबोर्ड पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2023 से 10 लाख वाहनों की बिक्री में शीर्ष 20 कंपनियों की 70 फीसदी हिस्सेदारी रही।

460 कंपनियां इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहन बनाती है यानी उद्योग के कुल 640 विनिर्माताओं में से 76 फीसदी मगर इस श्रेणी को सर्वाधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इस खंड में न केवल विनिर्माताओं की सर्वाधिक संख्या है बल्कि 100 वाहनों से कम बिक्री करने वालों की भी संख्या काफी है। 236 कंपनियों ने बताया कि उन्होंने 100 से कम गाड़ियां बेची हैं।

चूंकि इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहनों के खरीदार मुख्य रूप से निम्न आय वर्ग के लोग रहते हैं और वे ब्रांड के मुकाबले कीमत को प्राथमिकता देते हैं इसलिए शीर्ष दस कंपनियों की बिक्री कम रही है। कुल 3,88,043 इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहनों की बिक्री में इन शीर्ष 10 कंपनियों की सिर्फ 38 फीसदी हिस्सेदारी रही।

हालांकि, जैसे-जैसे पेट्रोल-डीजल वाले तीन पहिया वाहन निर्माता अपने ईवी कारोबार को बढ़ा रहे हैं नई कंपनियों के लिए जगह कम होने का खतरा है।

पेट्रोल-डीजल वाहन की पारंपिक कंपनी महिंद्रा ऐंड महिंद्रा और पियाजियो पहले से ही शीर्ष 10 विनिर्मताओं में शामिल हैं और इनके पास सामूहिक रूप से 11 फीसदी बाजार हिस्सेदारी है। एमऐंडएम पहले ही इस खंड में बादशाह है।

सायरा इलेक्ट्रिक ऑटो के प्रबंध निदेशक नितिन कपूर ने कहा, ‘ईवी स्टार्टअप कंपनियों की की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए गुणवत्ता, नवोन्मेष और लागत प्रतिस्पर्धा बनाए रखना प्रमुख कारक होंगे।’ सायरा इलेक्ट्रिक ऑटो भारत की तीसरी सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहन विक्रेता है।

First Published - September 22, 2023 | 11:22 PM IST

संबंधित पोस्ट