facebookmetapixel
Advertisement
Share Market Crash: IT शेयरों में भारी बिकवाली से मचा हड़कंप, सेंसेक्स 600 अंक से ज्यादा टूटा40 सुपरटैंकर और 80 मिलियन बैरल तेल: जानिए क्यों दुनिया भर की नजरें टिकी हैं होर्मुज परमहंगाई को लेकर सावधान रहने की जरूरत, इसलिए नहीं बदलीं ब्याज दरें: RBI गवर्नर संजय मल्होत्राMF मार्केट में बड़ा बदलाव! Zerodha लाया पहला ‘लाइफ साइकिल फंड’, सिर्फ ₹100 से निवेश की होगी शुरुआतग्रीन एनर्जी पर RIL का मेगा प्लान! जामनगर गीगा कॉम्प्लेक्स, कच्छ सोलर फार्म बनेंगे गेमचेंजर; बनेंगी 2 लाख नौकरियांApple यूजर्स को बड़ा झटका! महंगे हो सकते हैं iPhone, जानें वजह₹1 लाख करोड़ का बिजनेस, JIO IPO, Ajio और JioMart का विस्तार: ईशा अंबानी ने बताया RCPL का फ्यूचर प्लानITR filing: फॉर्म 16 से गायब रह सकती हैं ये 10 तरह की कमाई, ITR फाइल करते समय भूलना पड़ सकता है भारीRIL AGM 2026: जामनगर बनेगा दुनिया की पहली ऑटोनॉमस रिफाइनरी, पश्चिम एशिया संकट में 4 गुना बढ़ाई LPG सप्लाईReliance AGM में बोलीं ईशा अंबानी: रिलायंस रिटेल ने FY26 में रचा इतिहास, जियोमार्ट बना सबसे बड़ा क्विक कॉमर्स नेटवर्क

राजकोषीय घाटा कम करने का हो खाका

Advertisement

आईएमएफ ने वित्त वर्ष 2024 में देश की वृद्धि दर घटकर 6.1 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। वित्त वर्ष 2023 में इसके 6.8 फीसदी रहने का अनुमान है।

Last Updated- December 24, 2022 | 12:19 PM IST
fiscal deficit

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने आज कहा कि अर्थव्यवस्था में वृद्धि के अनुमानों पर बढ़ते जोखिमों और सरकारी खजाने में घटती गुंजाइश के
बीच मध्यम अव​धि में कर्ज स्थायित्व सुनि​श्चित करने के लिए भारत को राजकोषीय घाटा कम करने का अधिक महत्त्वाकांक्षी खाका तैयार करना
होगा।

आईएमएफ ने अपनी वा​र्षिक परामर्श रिपोर्ट (वा​षिक आर्टिकल-4) मेंकहा है कि वित्त वर्ष 2021 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और ऋण का अनुपात 89 फीसदी के उच्चतम स्तर पर था, जो मध्यम अव​धि में और बढ़ सकता है। आईएमएफ का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2024 में यह अनुपात वित्त वर्ष 2023 के 83.4 फीसदी से बढ़कर 83.9 फीसदी हो सकता है।

आईएमएफ ने कहा कि भारत में खजाने की मजबूती यानी राजकोषीय घाटा कम करने की धीमी रफ्तार का मतलब है कि इसका ऋण मौजूदा स्तर के आसपास बना रहेगा और वित्त वर्ष 2026 से ही इसमें धीरे-धीरे कमी आनी शुरू होगी। उसके अनुसार मध्यम अव​धि में राजकोषीय स्थायित्व करने के लिए घाटा कम करने के ज्यादा महत्त्वाकांक्षी और बेहतर अनुपालन की जरूरत है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि घाटा कम करने के उपायों की घोषणा से अनि​श्चितता कम होगी और जो​खिम भी घटेगा। इससे अल्पाव​धि में
भारतीय रिजर्व बैंक के मुद्रास्फीति नियंत्रण के प्रयासों को भी मदद मिलेगी।

आईएमएफ की राय ऐसे समय में आई है, जब वित्त वर्ष 2024 के लिए बजट तैयार किया जा रहा है। सरकार के सामने दुविधा है कि अगले वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा आक्रामक रूप से कम किया जाए या बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच वृद्धि को सहारा देने के लिए इसमें नरमी बरती जाए।

वित्त मंत्रालय ने राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम में संशोधन पहले ही अनि​श्चितकाल के लिए टाल दिया है। हालांकि उसने वित्त वर्ष 2026 में राजकोषीय घाटे को कम कर जीडीपी के 4.5 फीसदी पर सीमित करने का संकल्प किया है। वित्त वर्ष 2023 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 6.4 फीसदी रखा गया है।

आईएमएफ का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2024 में राजकोषीय घाटा मामूली कम होकर 6.2 फीसदी रह सकता है। इधर आईएमएफ में भारत के कार्यकारी निदेशक केवी सुब्रमणयन ने सरकार का रुख सामने रखते हुए भारत की राजकोषीय ​स्थिति पर जो​खिम के आईएमएफ के आकलन को नकार दिया।

उन्होंने कहा, ‘प्रशासन कर्मचारियों के इस विचार से सहमत नहीं है कि भारत की राजकोषीय ​स्थिति पर जोखिम है। वृद्धि की अनुकूल गति और घाटा कम करने के मजबूत संकल्प के बीच सार्वजनिक ऋण सही दायरे में है।’

आईएमएफ ने वित्त वर्ष 2024 में देश की वृद्धि दर घटकर 6.1 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। वित्त वर्ष 2023 में इसके 6.8 फीसदी रहने का अनुमान है।

Advertisement
First Published - December 24, 2022 | 12:19 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement