facebookmetapixel
Advertisement
सिर्फ सरकारी पैसों के भरोसे नहीं चलेगा काम, घरेलू बचत से ही बदलेगी देश की तस्वीरRBI की चेतावनी: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ेगा महंगाई का दबाव, मॉनसून की बेरुखी भी बढ़ाएगी संकटरुपये में रिकॉर्ड तेजी: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से दो महीने की सबसे बड़ी बढ़त, डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर परकुपोषण से उबर रहे भारत में अब मोटापा व मधुमेह बनी नई चुनौती, एक साल में 218% बढ़ी दवाओं की बिक्रीट्रक ड्राइवरों के लिए रेटिंग सिस्टम लाएगी सरकार, कौशल और चालान के आधार पर मिलेगी रैंकिंगSC का बड़ा फैसला: आदेश सुरक्षित रखने के 3 महीने के भीतर सुनाना होगा निर्णय, देरी पर बदलेगी पीठचुनावी वादे पूरे करना नवनिर्वाचित सरकारों के लिए साबित होगा भारी-भरकम सिरदर्दEditorial: देश के प्रमुख जलाशयों में तेजी से घट रहा पानी, अधिकतर नदी बेसिन गंभीर जल संकट के कगार परRBI Annual Report: RBI के विदेशी मुद्रा लेन-देन का मुनाफा 52% बढ़ा, कमाया ₹1.69 लाख करोड़ का लाभपश्चिम एशिया युद्ध के कारण बढ़ी घबराहट, देश में यूरिया 10% और DAP की बिक्री में 39% तक की बढ़ोतरी

Spicejet को झटका! हाई कोर्ट से नहीं मिली राहत

Advertisement

न्यायालय ने साल 2017 में विमानन कंपनी को 579 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया था और दोनों पक्षों को मध्यस्था के जरिये मामला सुलझाने को कहा था।

Last Updated- July 31, 2023 | 11:54 PM IST
Spicejet Q2FY26 results

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सन ग्रुप के कल एयरवेज और इसके संस्थापक एवं विमानन कंपनी के पूर्व प्रवर्तक कलानिधि मारन के साथ कानून लड़ाई में फंसी विमानन कंपनी स्पाइसजेट (Spicejet) की उस याचिका को आज खारिज कर दिया जिसमें मध्यस्थता फैसले को चुनौती दी गई थी।

मध्यस्थता अदालत ने साल 2018 में अपने एक फैसले के तहत मारन को ब्याज सहित 579 करोड़ रुपये लौटाने के लिए स्पाइसजेट और उसके प्रवर्तक अजय सिंह को निर्देश दिया था। उच्च न्यायालय का यह फैसला विमानन कंपनी के लिए झटका माना जा रहा है।

मध्यस्थता अदालत ने निर्देश दिया था कि पूर्व प्रवर्तक कल एयरवेज और मारन को वारंट के एवज 308 करोड़ रुपये और भुनाने योग्य तरजीही शेयर (सीआरपीएस) के एवज में 270 करोड़ रुपये लौटाए जाएंगे।

अदालत में कल एयरवेज और मारन का प्रतिनिधित्व करने वाली कानूनी फर्म करंजावाला ऐंड कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘मध्यस्था फैसले द्वारा निर्धारित तिथि के दो महीने के भीतर यदि स्पाइसजेट और सिंह निर्धारित रकम का भुगतान नहीं करते हैं तो उन्हें 18 फीसदी ब्याज का भुगतान भी करना पड़ेगा। इसके अलावा कल एयरवेज और मारन को फौरी राहत के तौर पर 12 फीसदी ब्याज भी देय होगा।’

खबरों के मुताबिक, विमानन कंपनी ने उस फैसले को रद्द करने की मांग की थी जिसमें उन्हें मारन को 270 करोड़ रुपये लौटाने को कहा गया था। साथ ही कंपनी ने ब्याज पर भी छूट की मांग की थी। कथित तौर पर मध्यस्थता फैसले के निष्पादन की कार्यवाही दिल्ली उच्च न्यायालय के एक अन्य पीठ के समक्ष लंबित है।

दोनों पक्षों के बीच साल 2015 से विवाद चल रहा है। उस वक्त मारन ने स्पाइसजेट में अपनी 58.46 फीसदी हिस्सेदारी को 2 रुपये की मामूली खरीद मूल्य पर बेच दिया था। इसके अगले साल यानी 2016 में मारन ने उन्हें शेयर जारी नहीं करने में विमानन कंपनी द्वारा समझौते के उल्लंघन का हवाला देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

न्यायालय ने साल 2017 में विमानन कंपनी को 579 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया था और दोनों पक्षों को मध्यस्था के जरिये मामला सुलझाने को कहा था। साल 2018 में मध्यस्थता अदालत ने मारन को ब्याज सहित 579 करोड़ रुपये लौटाने का आदेश दिया था।

मध्यस्थता फैसले के खिलाफ दोनों पक्षों ने अपील दायर की थी। मारन ने भी प्रवर्तन के लिए एक आवेदन दिया था। साल 2020 के सितंबर महीने में दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्पाइसजेट को मारन को 242 करोड़ रुपये के ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया था।

Advertisement
First Published - July 31, 2023 | 11:35 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement