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2026 में बढ़ेगी ट्रकों की मांग, लंबे समय बाद वाणिज्यिक वाहन उद्योग में दिखेगा उजाला

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यह रुझान ऐसे समय में दिख रहा है जब बसों की अटकी हुई मांग के कारण पिछले एक साल के दौरान बिक्री 53,000 वाहनों से बढ़कर 64,000 वाहन हो गई।

Last Updated- May 26, 2025 | 11:24 PM IST
hydrogen trucks India
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

पिछले कुछ वर्षों से देश में ट्रकों की बिक्री एक चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही है। उद्योग के लिए चिंता की बात यह है कि चक्रीय मांग कमजोर हो रही है। इससे बेड़ों में ट्रकों की औसत उम्र पिछले पांच वर्षों के दौरान बढ़कर 9 से 9.5 वर्ष की सर्वकालिक ऊंचाई पर पहुंच गई है। पहले यह आंकड़ा 7 से 7.5 वर्ष का हुआ करता था।

मगर उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2026 में काफी कुछ बदलाव दिख सकता है। उनका कहना है कि बेड़ों में पुराने ट्रकों को बदलने के कारण मांग बढ़ने के आसार हैं जिससे मध्यम एवं भारी वा​णि​ज्यिक वाहन (एमएचसीवी) श्रेणी में मध्य-एक अंक में वृद्धि दर्ज की जा सकती है। जाटो डायनेमिक्स के अध्यक्ष रवि भाटिया ने कहा कि 2025 में ट्रकों की औसत बेड़ा उम्र में मौजूदा स्तर से गिरावट आने अथवा स्थिरता दिखने की संभावना है। इस उम्मीद के बावजूद ट्रक मालिकों का कहना है कि फिलहाल कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। बीएस4 से बीएस6 उत्सर्जन मानदंडों में बदलाव के कारण ट्रकों की मासिक किस्त में 50 फीसदी तक की वृद्धि हुई है। इसके अलावा अतिरिक्त परिचालन खर्च और कुशल ड्राइवरों की कमी जैसी चुनौतियां बरकरार हैं।

अशोक लीलैंड के मुख्य वित्तीय अधिकारी केएम बालाजी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि इस साल ट्रकों की बिक्री में अच्छी वृद्धि दिखेगी, क्योंकि पिछले दो वर्षों से बिक्री में नरमी रही है। औसत बेड़ा उम्र अब 9 से 9.5 वर्ष की सर्वकालिक ऊंचाई पर पहुंच चुकी है।’

यह रुझान ऐसे समय में दिख रहा है जब बसों की अटकी हुई मांग के कारण पिछले एक साल के दौरान बिक्री 53,000 वाहनों से बढ़कर 64,000 वाहन हो गई। बालाजी ने कहा, ‘बस श्रेणी में भी काफी मांग दिख रही है। इसलिए हम वित्त वर्ष 2026 में एमएचसीवी श्रेणी की मांग में मध्य-एकल अंक की वृद्धि की उम्मीद करते हैं।’

वा​णि​ज्यिक वाहन उद्योग की अग्रणी कंपनी टाटा मोटर्स को भी इस साल मांग एक अंक में बढ़ने की उम्मीद है। टाटा मोटर्स के कार्यकारी निदेशक और प्रमुख (वा​णि​ज्यिक वाहन) गिरीश वाघ ने चौथी तिमाही के नतीजों की घोषणा के बाद विश्लेषकों से बातचीत में कहा, ‘मुझे लगता है कि सभी श्रे​णियों में एक अंक की वृद्धि देखनी चाहिए। भारी वा​णि​ज्यिक वाहन एवं बस श्रेणी में वृद्धि थोड़ी बेहतर दिख सकती है जबकि आईएलएमसीवी और एससीवी पिकअप श्रेणी में वृद्धि की रफ्तार थोड़ी सुस्त दिख सकती है।’ फाडा के आंकड़ों के अनुसार, अप्रत्याशित मौसम परि​​स्थितियों, फाइनैंस की कमी और उपभोक्ता धारणा में बदलाव जैसे कारकों के कारण पूरे साल के दौरान वा​णि​ज्यिक वाहनों की बिक्री 0.17 फीसदी की गिरावट के साथ लगभग सपाट रही।

भाटिया ने कहा, ‘बेड़े में ट्रकों की उम्र बढ़ने से आम तौर पर बिक्री कमजोर पड़ जाती है क्योंकि बेड़ा मालिक अपने वाहनों का उपयोग बढ़ाने के लिए नई खरीदारी में देरी करते हैं। मगर अब यह रुझान बदलता दिख रहा है।’ उन्होंने कहा, ‘पहले बेड़ा मालिक ट्रकों को 4-5 साल के इस्तेमाल के बाद अन्य बेड़ा मालिकों को बेच देते थे। पुराने ट्रक खरीदने वाले बेड़ा मालिक फिर अगले 6-7 साल तक उन ट्रकों का इस्तेमाल करते थे। इतने लंबे समय तक इस्तेमाल किए जाने के कारण ट्रकों की औसत बेड़ा उम्र बढ़  गई थी। मगर अब नीतिगत हस्तक्षेप के जरिये नवीनीकरण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।’

बिक्री में गिरावट 

बेड़ा मालिकों ने नए वाहनों में घटती दिलचस्पी के कई कारण बताए जो कोविड के बाद की नरमी और बीएस6 उत्सर्जन मानदंड के कारण कारोबार पड़ने वाले प्रभाव से संबं​धित हैं।

नमक्कल तालुक लॉरी ओनर्स एसोसिएशन (एनटीएलओए) के सचिव के. अरुल ने कहा, ‘हमें बीएस6 में बदलाव के लिए एक मशीन खरीदनी होगी जिसकी कीमत 4 से 5 लाख रुपये है। इसके अलावा सिस्टम में एक अतिरिक्त स्प्रे जोड़ना होगा जिसकी लागत 75 पैसे से लेकर 1 रुपये प्रति किलोमीटर अधिक होगी। हम प्रति ट्रक (12 पहियों वाला ट्रक) औसतन 90,000 रुपये ईएमआई का भुगतान कर रहे हैं जबकि बीएस6 से पहले यह आंकड़ा करीब 60,000 रुपये का था।’ नमक्कल को दक्षिण भारत का प्रमुख परिवहन केंद्र माना जाता है।

सख्त उत्सर्जन मानदंडों को पूरा करने के लिए बीएस6 इंजन उन्नत एग्जॉस्ट गैस आफ्टर-ट्रीटमेंट सिस्टम से लैस है। इन सिस्टम में डीजल पार्टिकुलेट फिल्टर (डीपीएफ), डीजल ऑक्सीडेशन कैटलिस्ट (डीओसी), सेलेक्टिव कैटलिटिक रिडक्शन (एससीआर) सिस्टम और अमोनिया स्लिप कैटलिस्ट (एएससी) शामिल हैं। अरुल ने कहा, ‘औसतन 40,000 रुपये प्रति माह वेतन देने के बावजूद हमें पर्याप्त कुशल ड्राइवर भी नहीं मिल रहे हैं।’

अप्रैल 2022 से प्रभावी वाहन स्क्रैपेज नीति में 15 साल से अधिक पुराने वाणिज्यिक वाहनों के लिए फिटनेस एवं उत्सर्जन की जांच कराना आवश्यक है। अप्रैल 2023 से भारी वाणिज्यिक वाहनों और जून 2024 से अन्य वाहनों का परीक्षण किया जा रहा है। अनुपालन न करने वाले ट्रकों को स्क्रैप किया जा रहा है। इस प्रकार नए वाहनों की खरीद को प्रोत्साहित किया जा रहा है जिससे बेड़ा उम्र कम होने की संभावना है। इससे मांग में सुधार होने की उम्मीद है।

अरुल ने आगे कहा, ‘इस नीति को जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए। मगर पुराने वाहनों के लिए अच्छा मुआवजा मिलना चाहिए। सरकार को थोड़ी उदारता दिखानी चाहिए क्योंकि इसके तहत मालिक को प्रति ट्रक 3 से 4 लाख रुपये ही मिलेंगे, जबकि नए ट्रकों के लिए उन्हें 50 लाख रुपये खर्च करने पड़ेंगे। स्क्रैपिंग से मिलने वाली इस रकम से कोई नया ट्रक कैसे खरीद पाएगा?’

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First Published - May 26, 2025 | 10:55 PM IST

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