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कार बाजार में बढ़ रही काले रंग की चमक, युवा खरीदारों ने बदला कलर ट्रेंड

नई युवा पीढ़ी (जेन ज़ी) एवं युवा खरीदारों के बीच काले रंग की बढ़ती धमक से ऐसे वाहनों की बिक्री वाहन उद्योग के औसत से अधिक रही है

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दीपक पटेल   
Last Updated- January 12, 2026 | 11:05 PM IST

पिछले पांच वर्षों के दौरान सफेद रंग के यात्री वाहनों की बिक्री लगातार कम हो रही है। जैटो डायनेमिक्स के अनुसार सफेद वाहनों की हिस्सेदारी वर्ष 2021 में कुल बिक्री में लगभग 43.9 फीसदी रही थी मगर यह 2025 में कम होकर 40.7 फीसदी रह गई। हिस्सेदारी कम होने के बावजूद सफेद रंग खरीदारों के बीच पसंदीदा बना हुआ है। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने भी जैटो डायनेमिक्स के आंकड़े देखे हैं। मगर काले रंग की कारों का जलवा भी तेजी से बढ़ा है। उक्त अवधि में ही सालाना बिक्री के आंकड़ों में काले रंग की कारों की हिस्सेदारी 2021 में दर्ज लगभग 14.8 फीसदी से बढ़कर 2025 में 20.76 फीसदी हो गई है।

मारुति सुजूकी में वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (विपणन एवं बिक्री) पार्थो बनर्जी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि काले रंग की कारों की बिक्री पिछले पांच वर्षों में काफी बढ़ी है। नई युवा पीढ़ी (जेन ज़ी) एवं युवा खरीदारों के बीच काले रंग की बढ़ती धमक से ऐसे वाहनों की बिक्री वाहन उद्योग के औसत से अधिक रही है।

टाटा मोटर्स में इंडिया डिजाइन स्टूडियो के प्रमुख अजय जैन ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि एक दौर था जब सफेद रंग के वाहनों की अपनी व्यावहारिकता और रीसेल वैल्यू के लिए निर्विवाद रूप से लोगों के बीच खासी धाक हुआ करती थी। जैन ने कहा कि अब उपभोक्ताओं की प्राथमिकताएं बदलने के साथ इस रंग के प्रति चाहत भी कम होने लगी है।

उन्होंने कहा,‘कारों की खरीदारी पहले खूब सोच-समझकर और विशेष मकसद के लिए होती थी मगर अब लोगों की निजी पसंद ज्यादा मायने रखने लगी है। आधुनिक खरीदार जीवंत, विशिष्ट रंगों की तलाश कर रहे हैं जो आत्मविश्वास और एक बड़े हाव-भाव का संकेत देते हैं।’

जैन ने कहा कि काली कारों की बढ़ती लोकप्रियता उपभोक्ता प्राथमिकताओं के साथ-साथ वाहन निर्माताओं की कारोबारी रणनीतियों में नवाचार को दर्शाती है। महंगी एवं जीवन शैली आधारित खंडों में गहरे रंग परिष्कार, व्यक्तित्व और स्टेटस का प्रतीक हैं जो उच्च फैशन और विलासिता के साथ उनके संबंधों को परिलक्षित करते हैं।

उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजारों और भारत में उम्रदराज खरीदार तटस्थता की वजह से हल्के रंगों को पसंद करते हैं जबकि युवा पीढ़ियां काले रंग को कद्दावर हाव-भाव के रूप में अपनाती हैं। हालांकि, सफेद रंग अपनी चमक और व्यावहारिक लाभों के कारण शीर्ष पर बना हुआ है। भारत में यात्री वाहनों की थोक बिक्री 2025 में 45.6 लाख रही जो सालाना आधार पर 5.06 फीसदी अधिक है। अधिकांश वृद्धि 22 सितंबर को जीएसटी दरों में कटौती प्रभावी होने के बाद 2025 की अंतिम तिमाही में दर्ज हुई।

जैटो डायनेमिक्स के आंकड़ों के अनुसार साल 2025 में भारत में जितनी एसयूवी की बिक्री हुई उनमें लगभग 30 फीसदी काले रंग की थीं। यह हैचबैक खंड से बिल्कुल अलग है जिसमें 2025 में काले रंग की कारों की हिस्सेदारी केवल 6.77 फीसदी थी।

जैटो डायनेमिक्स इंडिया के अध्यक्ष रवि भाटिया ने कहा कि काला रंग निर्माण के दृष्टिकोण से आकर्षक है क्योंकि यह ‘ऊंची मार्जिन के साथ उत्पादन प्रक्रिया (असेंबली लाइन) को सुव्यवस्थित करता है’। उन्होंने कहा कि काला रंग पूरी कार तैयार करने की पूरी प्रक्रिया को किफायती बना देता होता है। यह पेंट प्रक्रिया को सरल बनाते हुए पैनल टॉलरेंस को छुपा लेता है। दूसरे रंग ऐसा नहीं कर सकते।

भारत में वाहन निर्माताओं ने काले रंग के वाहन बनाकर खूब फायदा उठाया है। इससे उन्हें डी-क्रोमिंग और डार्क अलॉय जैसे ऊपरी बदलाव कर अधिक दाम हासिल करने में मदद मिलती है और उन्हें इसके लिए खास मेहनत भी नहीं करनी पड़ती है।

भाटिया ने कहा कि विलासिता एवं अत्यधिक महंगे (लग्जरी ऐंड अल्ट्रा-प्रीमियम) खंडों में काला रंग रुतबे और ओहदे के प्रदर्शन का स्वाभाविक विकल्प बना हुआ है।

उच्च-स्तरीय ब्रांडों के लिए यह न केवल एक रंग है बल्कि पेंट की गहराई और सतह की पूर्णता का भी परीक्षण है क्योंकि कोई भी खामी तुरंत दिखाई देने लगती है। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर खरीदार अक्सर काले रंग की एसयूवी चुनते हैं, वहीं भारत में अमीर लोग इसे औपचारिक प्रतिष्ठा के संकेत के रूप में अपनाते हैं। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि भारत जैसे गर्म देश में काल रंग असहज माना जाता है और रखरखाव की चुनौतियां भी आती हैं।

भाटिया ने कहा कि हालांकि, भारत के बड़े बाजारों में सफेद रंग गर्मी बर्दाश्त करने की क्षमता और मजबूत रीसेल वैल्यू के कारण पसंदीदा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि सफेद रंग तापमान नहीं बढ़ने देता है, गर्मी में केबिन को ठंडा रखता है और एयर कंडीशनिंग पर भार कम करता है। इसके साथ ही ईंधन दक्षता में सुधार कर सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि निर्माताओं के लिए सफेद रंग सबसे सुरक्षित विकल्प है क्योंकि इसमें उत्पादन की जटिलता कम होती है और ‘यह गहरे रंगों की तुलना में धूल और मामूली खरोंच को बेहतर ढंग से छुपाता है’। भाटिया ने कहा कि इस वजह से यह भारतीय सड़क और जलवायु परिस्थितियों के लिए उपयुक्त माना जाता है। भाटिया ने कहा कि लग्जरी खंड में सफेद रंग ‘बुनियादी ’ से ‘शानदार’ हो जाता है। उन्होंने कहा कि सफेद रंग कारों को बेहतरीन एवं आकर्षक बना देता है और वे हमेशा नई जैसी दिखती हैं।

First Published : January 12, 2026 | 10:35 PM IST