कर्नाटक उच्च न्यायालय ने आज पूर्व मुख्यमंत्री एन धरम सिंह की यह दलील खारिज कर दी कि बतौर सक्षम प्राधिकार राज्यपाल को किसी याचिका में पक्ष नहीं बनाया जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश विक्रमजीत सेन की अगुवाई वाली एक खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह दलील खारिज कर दी। याचिकाकर्ता नतेश ने 23 जून 2009 के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें तत्कालीन राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर ने अवैध खनन पर लोकायुक्त की अंतरिम रिपोर्ट के संबंध में धरम सिंह को आरोप से मुक्त कर दिया था।
इस लोकायुक्त रिपोर्ट मंे धरम सिंह पर अवैध खनन के सिलसिले में आरोप लगाया गया था और राज्य सरकार से कहा गया था कि कुछ इलाकों में खनन गतिविधि की इजाजत देने के धरम सिंह के फैसले से कथित रूप से हुआ 23 करोड़ का नुकसान उनसे वसूला जाए।
जब कर्नाटक में राष्ट्रपति शासन था तब ठाकुर ने धरम सिंह के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।
इस मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी।
भाषा
नननन