कई लोग छड़ी का सहारा लेते हुए मतदान केंद्रों तक पहुंचे और कुछ व्हील चेयर पर अपने परिजनों का सहारा लेकर वोट डालने आए ।
दृष्टि बाधित 79 वर्षीय सुखबीर सिंह अपने छह वर्ष के पोते के साथ मतदान करने आए थे ।
लक्ष्मीनगर में मतदान करने आए सिंह ने कहा, मैं अभी तक मतदान करता आया हूं । कई लोग आश्चर्य जताते हैं कि एक वोट से क्या फर्क पड़ेगा । लेकिन मैं जानता हूं कि हर एक वोट कीमती है ।
मतदान केंद्रों पर व्हीलचेयर एवं रैम्प के नहीं होने के बावजूद ऐसे मतदाताओं का उत्साह कमजोर नहीं पड़ा ।
कृष्णा नगर की 78 वर्षीय आई. पी. फौज छड़ी के सहारे चलते हुए वोट डालने आई थीं और प्रसन्न मुद्रा में मतदान केंद्र से बाहर निकलीं ।
उन्होंने कहा, मुझे लाइन में खड़ा होने से छूट दे दी गई और अधिकारी मुझे सहारा देकर मतदान केंद्र के अंदर ले गए ।
बहरहाल उन्होंने कहा कि अगर व्हीलचेयर होता तो उन्हें सहूलियत होती क्योंकि वह आर्थराइटिस से पीडि़त हैं ।
उन्होंने कहा, हमारे अभिभावकों ने हमें सिखाया है कि हमें हमेशा अपने अधिकारों का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि हम ही सरकार बनाते हैं ।
75 वर्षीय मांगो देवी ने बताया कि उनके प्रयास एवं उत्साह को देखते हुए कुछ लोग उन्हें लेकर मतदान केंद्र के अंदर गए ।
देवान सिंह बिष्ट :80: अपने पूरे परिवार के साथ मतदान करने आए थे । उन्होंने कहा कि जब वादे के मुताबिक सुविधाएं नहीं होतीं तो कई लोग मतदान करने के लिए नहीं निकलना चाहते ।
उनके बेटे ने कहा, मेरे पिता वृद्ध हैं फिर भी वोट डालने के लिए उन्होंने हम पर जोर डाला । उनका उत्साह देखकर मैं उत्साहित हुआ ।
लक्ष्मीनगर के सर्वोदय बाल विद्यालय में कुछ बुजुर्ग इलेक्टि्रक ऑटोरिक्शा से वोट डालने पहुंचे ।