अभियोजन के अनुसार सोनी एवं चौधरी को लोकायुक्त पुलिस ने 28 अप्रेल 2011 को खरगापुर में नौ हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकडा था। उन्होने एक स्थानीय निवासी हुकुम सिंह यादव से एक मामले में उसका नाम हटाने के लिये 12 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी लेकिन सौदा नौ हजार रुपये में पटा था।
टीकमगढ के प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश उपेन्द्र सिंह ने इस मामले का निराकरण करते हुए दोनो आरोपियों को तीन तीन साल के कारावास और दो दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई जबकि सह अभियुक्त वाहन चालक हरिराम को बरी कर दिया।