डेलायट की एक रिपोर्ट मंे कहा गया है, आर्थिक वृद्धि को रफ्तार देने के लिए पूंजी की जरूरत को देखते हुए बढ़ती रिण की मांग को पूरा करने के लिए विदेशी बैंकांे के साथ निजी क्षेत्र के नए बैंकांे को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।
विदेशी बैंक नियमन तथा 2008 के किसी संकट से बचने के लिए रिजर्व बैंक ने इसी महीने कहा था कि जटिल ढांचे वाले और उचित खुलासा नहीं करने वाले विदेशी बैंकांे को भारत मंे सिर्फ पूर्ण सहायक अनुषंगी :डब्ल्यूओएस: के जरिये परिचालन करना होगा।
इन दिशानिर्देशांे के अनुसार यदि विदेशी बैंक डब्ल्यूओएस बन जाते हैं, तो उनके साथ एक तरह से सरकारी बैंकांे की तरह व्यवहार किया जाएगा। वे सार्वजनिक क्षेत्र या निजी क्षेत्र के किसी बैंक की तरह शाखाएं खोल सकेंगे।
मंगलवार को रिजर्व बैंक ने कहा था कि डब्ल्यूओएस मंे तब्दील होने वाले विदेशी बैंकांे को पूंजीगत लाभ कर व स्टाम्प शुल्क की छूट भी मिलेगी। देश मंे कुल 45 विदेशी बैंक कार्यरत हैं और मार्च, 2013 तक इनकी शाखाआंे की संख्या 333 थी।