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लॉकडाउन में परिजनों से मुलाकात नहीं कर पा रहे कैदी फोन से कर रहे बातचीत

PTI

- May,09 2020 4:24 AM IST

आठ मई (भाषा) उत्तर प्रदेश की जेलों पर किये गए एक अध्ययन में पता चला है कि कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन के बीच कैदियों की उनके परिजनों से मुलाकात बंद होने की स्थिति में टेलीफोन से बातचीत का अनुपात सामान्य दिनों की तुलना में कम से कम तीन गुना बढ़ गया है।

‘तिनका तिनका फाउंडेशन’ द्वारा किये गए अध्ययन से पता चलता है कि कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन के दौरान राज्य की जेलों में फोन-कॉल का अनुपात कम से कम तीन गुना बढ़ गया है। इसके परिणाम बताते हैं कि गौतमबुद्ध नगर जिला जेल में हर रोज कैदियों के लिए आने वाले फोन कॉल की संख्या सर्वाधिक है।

फांउडेशन की विज्ञप्ति के अनुसार इस अध्ययन में प्रदेश की पांच प्रमुख जेलों के 15,790 बंदियों के फोन कॉल संबंधी आंकड़ों को शामिल किया गया है, जिन्हें प्रदेश के जेल विभाग से प्राप्त किया गया। इन जेलों में नैनी (केंद्रीय जेल), लखनऊ (जिला जेल), आगरा (जिला जेल), गाजियाबाद (जिला जेल) और गौतम बुद्ध नगर (जिला जेल) शामिल हैं।

‘तिनका तिनका फाउंडेशन’ की संस्थापक वर्तिका नन्दा के अनुसार जेलों में फोन की यह सुविधा जेल सुधार की दिशा में एक कारगर कदम है।

उन्होंने कहा कि जेलों में अब संवाद की एक नई परंपरा बन रही है जिससे जेलों में सुधार लाने और उन्हें मानवीय बनाने में मदद मिलेगी।

गौरतलब है कि लॉकडाउन में कैदियों से उनके परिजनों की मुलाकात पर रोक के बाद से उत्तर प्रदेश की 69 जेलों में बंदियों के लिए फोन की निशुल्क सुविधा शुरु कर दी गई है।

विज्ञप्ति में उत्तर प्रदेश कारागार विभाग के महानिदेशक आनंद कुमार के हवाले से कहा गया है कि कोरोना संकट की शुरुआत के साथ ही विभाग ने पूरी सक्रियता दिखाते हुए जेलों में टेलीफोन की सुविधा उपलब्ध करवा दी। जेल स्टाफ यह कोशिश कर रहा है कि सभी बंदियों को फोन के जरिए अपने परिवारों से संपर्क करने का पूरा मौका मिले।

शोध से यह भी सामने आया है कि कोरोना वायरस संकट से पहले ज्यादातर जेलों में महिलाओं को फोन करने की सुविधा नहीं दी जाती थी क्योंकि फोन बूथ पुरुषों की जेल में लगे होते हैं। अब जेलों ने फोन लाइनों की सुविधा सभी बंदियों के लिए बराबरी के साथ उपलब्ध करवा दी है। जेल प्रशासन ने फोन ऐसी जगहों पर लगवा दिए हैं जहां महिलाओं के जाने पर पाबंदी नहीं है।

भाषा मानसी उमा

उमा

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