रांची विश्वविद्यालय के 28वें दीक्षान्त समारोह में अपने संबोधन में केन्द्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिन्दे ने यह यह उद्गार व्यक्त किये।
शिन्दे ने कहा, आधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग का ग्यान, नैतिकता एवं उद्यम के क्षेत्र में नेतृत्व क्षमता का विकास हमारा मुख्य लक्ष्य होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि तेजी से विकसित हो रहे भारत के स्थाई और उत्तम विकास पर सभी का जोर होना चाहिए। ऐसे विकास में सभी दृष्टिकोणों का समावेश होना आवश्यक है।
शिन्दे ने कहा कि तथ्यों के सम्यक आंकलन और वास्तविक स्थितियों के आधार पर ही कोई दूरदृष्टि बनानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए पिछले अनुभवों का लाभ उठाते हुए देश और समाज को आगे ले जाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समाज में ऐसे अनेक कारक हैं जो बड़ी तेजी से सामाजिक परिवर्तन को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने छात्रों का आह्वान किया कि वह अपनी शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए दुनिया में कहीं भी जायें। लेकिन अपनी मातृभूमि की सेवा का जज्बा हमेशा अपने मन में संजोकर रखें।
उन्होंने कहा कि जीवन में अनेक बार युवाओं को निराशा भी घेरती है लेकिन उससे कभी सच्चाई के पथ पर अपने कदम को डिगने नहीं देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ग्यान बढ़ाने के साथ मूल्यों को भी कायम रखना होगा तभी यह समाज और देश के लिए उपयोगी होगा।