राजन ने यहां बैंकों के सम्मेलन बैंकॉन 2013 को संबोधित करते हुए कहा, े हम भारत की क्षमता को लेकर गहरे निराशावाद के दौर से गुजर रहे हैं। यह निराशावाद केवल विदेशी मीडिया या उनके पाठकों तक नहीं फैला है बल्कि इसने हमारी घरेलू बहसों को भी प्रभावित किया है। हर नीति को संदेह की निगाह से देखा जाता है और किसी भी गड़बड़ी के साक्ष्य के लिए जांची जाती है। े
उन्होंने कहा, े फैसले करने के लिए कोई अच्छा पहलू नहीं होने के बीच, इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि निर्णय प्रक्रिया धीमी हो गई है। इसका समाधान हालांकि निष्कि्रयता या बैठे रहने से नहीं होगा बल्कि कार्रवाई से होगा.. ऐसी कार्रवाई से जो उद्देश्यपूर्ण, किसी भी आग्रह से रहित तथा प्रभावी हो। े
जारी भाषा
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