आरबीआई के गवर्नर रघुराम राजन ने मौद्रिक नीति की दूसरी तिमाही समीक्षा में कहा घरेलू दिक्कतों के कारण वृद्धि के सामने जोखिम है और वाह्य माहौल में अचानक बदलाव के प्रति संवेदनशीलता बरकरार है।
आरबीआई ने 30 जुलाई को मौद्रिक नीति की पहली तिमाही समीक्षा में वित्त वर्ष 2013-14 के लिए 5.5 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान जाहिर किया था।
अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही :अप्रैल-जून: समीक्षा में 4.4 प्रतिशत रही। वित्त वर्ष 2012-13 में वृद्धि दर पांच प्रतिशत थी जो पिछले दशक का न्यूनतम स्तर है।
राजन ने कहा कृषि क्षेत्र में वृद्धि के साथ निर्यात में वृद्धि और कुछ सेवाओं में सुधार के संकेत से 2013-14 की दूसरी तिमाही में पहली छमाही के मुकाबले वृद्धि बढ़ने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि निवेश संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा अटकी पड़ी बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी मिलने से निवेश बढ़ेगा और साल के अंत में सभी आर्थिक गतिवधियों में तेजी आएगी।
आरबीआई का अनुमान विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष :आईएमएफ: के अनुमानों के अनुरूप है जिसने इस महीने भारत की वृद्धि का अनुमान घटाया था।
विश्व बैंक ने चाल वित्त वर्ष के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान 6.1 प्रतिशत से घटाकर 4.7 प्रतिश किया। इसके अलावा आईएमएफ ने 2013-14 में भारत के लिए 3.75 प्रतिशत की औसत वृद्धि दर का अनुमान जाहिर किया है।
राजन ने कहा कि टिकाउ उपभोक्ता और पूंजीगत उत्पाद क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधि कम हुई है जो खपत और निवेश की मांग में कमी से जाहिर होता है।