दिल्ली उच्च न्यायालय के एयर इंडिया प्रबंधन और हड़ताली पायलटों को आपसी बातचीत कर समझौता करने की सलाह देने के ठीक बाद हड़ताली पायलटों ने आज कहा कि वह अपनी करीब दो महीने लंबी हड़ताल वापस लेने से पहले वकीलों से सलाह लेंगे।
हड़ताल का नेतृत्व कर रहे इंडियन पायलट्स गिल्ड :आईपीजी: के संयुक्त सचिव तौसीफ मुकदद्म ने मुंबई से फोन पर बताया अदालत ने बहुत सकारात्मक टिप्पणी की है। इसने कहा है कि सभी पायलटों को वापस लिया जाना चाहिए और बर्खास्त किये गये तथा अन्य पायलटों के बीच कोई फर्क नहीं होना चाहिए। हम अदालत की टिप्पणी से खुश हैं।
उन्होंने कहा हम अपने वकीलों से बातचीत और उच्च न्यायालय के फैसले की प्रति प्राप्त होने के बाद ही हड़ताल वापस लेने के संबंध में फैसला करेंगे।
आईपीजी के कुछ अन्य नेताओं ने यहां कहा कि अदालत ने प्रबंधन से यह भी कहा कि एयर इंडिया के सभी विमानों को उड़ाया जाना चाहिए और सभी पायलटों को काम पर लौटने की मंजूरी दी जानी चाहिए।
उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय ने सभी हड़ताली पायलटों से 48 घंटे के भीतर काम पर लौटने की इच्छा व्यक्त करते हुये हलफनामा दायर करने को कहा है। साथ ही दोनों पक्षों को छह जुलाई को मुख्य श्रमायुक्त के सामने समझौते की प्रक्रिया के लिए पेश होने का निर्देश दिया है।
आईपीजी नेताओं ने कहा समझौता प्रक्रिया की रपट नौ जुलाई को उच्च न्यायालय के सामने पेश की जानी है।
हड़ताल के कारण एयर इंडिया को होने वाला नुकसान बढ़कर 600 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। हड़ताल के कारण एयरलाइन को कई अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर उडान में कटौती भी करनी पड़ी।