मार-पीट और इसी तरह के अन्य प्रताड़नाओं के कारण बेटी का मासूम चेहरा इतना बदल गया था कि एक बार को तो मां भी उसे नहीं पहचान सकी । किशोरी के सिर और शरीर पर जख्म हैं ।
अस्पताल में मां-बेटी एक-दूसरे के गले लगकर नि:शब्द रोते रहे ।
कुछ देक बाद होने की सांसें सम हुई और दोनों ने भाषा संथाली में अपनी-अपनी आपबीती सुनायी ।
रिषीकांत ने पीटीआई को बताया कि किशोरी की मां झारखंड के साहेबगंज से आज सुबह सात बजे दिल्ली पहुंची । वह झारखंड पुलिस, साहेबगंज श्रम निरीक्षक और गैर सरकारी संगठन शक्ति वाहिनी के कार्यकारी निदेशक के साथ यहां पहुंची । संगठन ने किशोरी को मुक्त कराने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है ।
किशोरी की मां को कुछ औपचारिक्ताएं पूरी करने के लिए रेलवे स्टेशन से पहले झारखंड भवन ले जाया गया । वह दोपहर करीब 12 बजकर 45 मिनट पर अधिकारियों के साथ अपनी बच्ची से मिलने अस्पताल पहुंचीं ।
किशोरी के नियोक्ताओं ने कथित तौर पर उसे प्रताडि़त किया था, उसे भूखा रखा था और उसे कमरे में बंद किया था । उसे दिल्ली पुलिस ने शक्ति वाहिनी के साथ मिलकर सोमवार को मुक्त कराया था ।