अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं ने अफगानिस्तान के लिए आज 16 अरब डालर के विकास अनुदान की पेशकश की। यह अनुदान विदेशी सैनिकों के अफगानिस्तान छोड़कर जाने के बाद उसे फिर से उठापटक में जाने से बचाने के लिये होगा। हालांकि, इसके साथ कुछ शर्ते भी जुड़ी होंगी।
हालांकि, दानदाताओं ने यह भी कहा है कि प्रस्तावित अनुदान पर करीबी निगरानी रखी जाएगी ताकि यह भ्रष्टाचार या कुप्रबंधन की भेंट न न चढ जाये।
यहां, आयोजित एक दिवसीय कार्यक्रम में लगभग 70 देशों व संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए और 2014 तथा उसके बाद महत्वपूर्ण समयावधि में अफगानिस्तान को मदद के लिए आधार सीमा तय की। नाटो सेनाओं के अधिकतर सैनिक 2014 में अफगानिस्तान से चले जाएंगे और सुरक्षा का जिम्मा खुद अफगानिस्तान के पास होगा।
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई ने कहा कि भविष्य में देश के सामने कठिन डगर है हालांकि उन्होंने सुरक्षा सुधारने तथा भ्रष्टाचार से लड़ने का आह्वान भी किया।
उल्लेखनीय है कि 16 अरब डालर की यह पेशकश विश्व बैंक के उस अनुमान के आसपास ही है जो उसने अफगानिस्तान में परिवर्तन को पूरा करने के अंतर को पाटने के लिए जरूरी मानी थी।
इस बैठक की अगली या अनुवर्ती बैठक 2014 में ब्रिटेन में होगी।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा, े मैं उत्साहित हूं कि सदस्य देशों ने 16 अरब डालर जुटाने की इच्छा जताई है। अफगानिस्तान ने महत्वपूर्ण प्रगति की है लेकिन यह अभी कमजोर है। े
अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि उनका देश 2017 तक उसी औसत से अनुदान देता रहेगा जितना वह पिछले दशक में देता रहा है। अफगानिस्तान के लिए अमेरिका पहला तथा जापान दूसरा सबसे बड़ा दानदाता है।
एपी
नननन