कार्पोरेट कार्य मंत्रालय नए कंपनी विधेयक में कंपनियों के लिए हर पांच साल में सांविधिक लेखापरीक्षकों को बदलने की अनिवार्यता वाले प्रावधानों को सुधारने में लगा है। इसका उद्येश्य इन प्रावधानों को अधिक व्यावहारिक बनाना है।
कार्पोरेट कार्य मंत्री वीरप्पा मोईली ने आज यहां एक सम्मेलन के दौरान
संवाददाताओं से अगल बतचीत से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा इसे हल्का नहीं बनाया जा रहा बल्कि इसे और व्यावहारिक बनाया जा रहा है। कंपनी दो-तीन लेखा परीक्षकों के साथ नहीं चल सकती है। जो विदेशों में भी कारोबार कर रहा है उसे असुविधा नहीं होनी चाहिए।
कंपनी विधेयक 2011 में प्रावधान है कि सूचीबद्ध कंपनियांे को हर पांच साल पर अपनी लेखारीक्षाकंपनी और लेखा परीक्षक दोनों को दबलने होंगे।
विधेयक की जांच करने वाली वित्त संबंधी संसदीय समिति ने इस प्रावधान को मंजूरी दे थी पर उद्योग जगत ने कहा कि लेखा कंपनियों को बदलने से कोई उद्येश्य प्राप्त नहीं होगा।