मोबाइल की मूल्यवर्धित सेवाआंे
रिपोर्ट मंंे कहा गया है कि एम-वैस का बाजार यानी रिंगटोन और एसएमएस आधारित एप्लिकेशंस आदि का बाजार 2012 मंे 28 प्रतिशत बढ़ेगा। फिलहाल यह बाजार 26,000 करोड़ रुपये का है।
इसमंे कहा गया है कि मार्च, 2012 तक देश में मोबाइल इंटरनेट उपयोगकर्ताआंे की संख्या 4.8 करोड़ थी।
रिपोर्ट मंे कहा गया है कि हाल के वर्षों मंे औसत राजस्व प्रति ग्राहक :एआरपीयू: मंे कमी आई है, लेकिन पिछले एक साल मंे प्रति ग्राहक एमवैस खर्च मंे 28 फीसद का इजाफा हुआ है और यह एआरपीयू का 27 प्रतिशत है।
दिसंबर, 2011 मंे जीएसएम सेवाआंे के लिए एआरपीयू 96 रुपये था, जबकि सीडीएमए सेवाआंे के लिए यह 73 रुपये था। रिपोर्ट मंे कहा गया है कि वाइस सेवाआंे पर निर्भरता घट रही है और औसत राजस्व प्रति ग्राहक बढ़ाने के लिए एमवैस सेवाआंे पर जोर दिया जाना चाहिए।
फिलहाल मोबाइल वैस बाजार में रिंगटोन की हिस्सेदारी 27 फीसद की है। वहीं एसएमएस आधारित एप्लिकेशंस का हिस्सा 17 प्रतिशत, मोबाइल एप्लिकेशंस का 10 प्रतिशत तथा गेम्स का 8 प्रतिशत है।
रिपोर्ट मंंे अनुमान लगाया गया है कि आगामी वर्षों मंे जहां एआरपीयू मंे 5 से 8 प्रतिशत का इजाफा होगा, वहीं इसमंे वॉइस सेवाआंे का योगदान घटेगा तथा डाटा सेवाआंे की बड़ी हिस्सेदारी होगी।