खगोलशास्ति्रयों ने पहली बार दो आकाशगंगा समूहों के बीच अदृश्य डार्कमैटर का विशाल तंतु खोजा है।
ऐसा माना जाना है कि पूरे ब्रह्मांड का एक बड़ा हिस्सा ऐसे ही डार्कमैटर से बना हुआ है । इसे देखा नहीं जा सकता है । यह ना तो रोशनी का अवशोषण करता है और ना ही किसी प्रकार के विद्युतचुंबकीय तरंगों का उत्सर्जन करता है । इसे सिर्फ इसके गुरूत्व बल के आधार पर पहचाना जा सकता है ।
वैग्याानिकों ने इससे पहले भी कई बार डार्कमैटर फिलामेंट :तंतुओं: को पहचानने की कोशिश की है । ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मांड का 98 प्रतिशत हिस्सा डार्कमैटर से बना हुआ है ।
वैग्यानिकों ने दो आकाशगंगा समूहों एबेल 222 और एबेल 223 के बीच एक विशाल तंतु खोजा है, जो दोनों के बीच एक पुल का निर्माण करता है। यह धरती से 2.7 अरब प्रकाश वर्ष दूर है ।
जर्मनी के यूनिवर्सिटी ऑब्जर्वेटरी म्यूनिख के खगोलशास्त्री जॉर्ग डेइट्रिच का कहना है, यह पहली बार है जब डार्कमैटर तंतु को उसके ग्रेविटेशनल लेंसिंग प्रभाव की मदद से खोजा गया है और उसपर कोई विवाद नहीं है ।
डेइट्रिच ने स्पेस डॉट कॉम को बताया, यह ब्रह्मांड के निर्माण के मान्य सिद्धांत की पुष्टि करता है।