न्यायमूर्ति एस राजेश्वरन और न्यायमूर्ति ए मुरूगस्वामी की पीठ ने कांचीपुरम के जिलाधीश द्वारा मई में दिये गये गुरू की नजरबंदी के आदेश और राज्य सरकार का सात अक्तूबर का संशोधित आदेश खारिज कर दिया।
गुरू की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर अदालत ने कहा कि हिंसा रामदास की गिरफ्तारी के बाद भडकी थी। उस हिंसा में अनेक सरकारी और निजी वाहन नष्ट हो गये थे।
पीठ ने कहा कि हिंसा भडकने के लिये बंदी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि यह उसके भाषण के छह दिन बाद भडकी थी।
पीठ ने गृह सचिव और कांचीपुरम के जिलाधीश को गुरू को रिहा करने के आदेश दिये बशर्ते वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हों।
गुरू को 25 अप्रैल को मामलापुरम में पीएमके की युवा शाखा की रैली में दिये उनके भाषण के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था।