एचएसबीसी की रिपोर्ट में यह बात कही गयी है। वैश्विक ब्रोकरेज कंपनी के अनुसार घाटे के फिर बढ़ने की आशंका है क्योंकि मौसमी मांग के साथ घरेलू मांग में सुधार से आयात में वृद्धि का अनुमान है।
सोने के आयात में कमी तथा निर्यात में वृद्धि से देश का सीएडी 2013-14 की जुलाई-सितंबर तिमाही में तेजी से घटकर 5.2 अरब डालर रहा जो जीडीपी का 1.2 प्रतिशत है।
चालू खाते का घाटा पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 21 अरब डालर रहा था जो सकल घरेलू उत्पाद :जीडीपी: का 5 प्रतिशत के बराबर है।
एचएसबीसी के मुख्य अर्थशास्त्री :भारत और आसियान: लीफ एसकेसेन ने कहा, हाल की तिमाही में घाटे में कमी तथा विदेशों से पूंजी आकर्षित करने के सफल उपायों के बावजूद भारतीय नीति निर्माताओं को अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नकदी बढ़ाने के उपायों को वापस लेने से पहले मुद्रा के बाहर जाने को लेकर जो खतरा है, उससे निपटने के प्रयास करने होंगे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्यात बढ़ने के कारण देश का चालू खाते का घाटा पिछले साल से कम रहने का अनुमान है। लेकिन नीति निर्माताओं को अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नकदी बढ़ाने के उपायों को वापस लेने से पहले सतर्क रहने की जरूरत है।
सरकार तथा रिजर्व बैंक दोनों चालू खाते का घाटा मौजूदा वित्त वर्ष में 56 अरब डालर से कम रहने का अनुमान जता रहो है जो पिछले वित्त वर्ष में 88.2 अरब डालर था जो जीडीपी का 4.8 प्रतिशत था।
भाषा