उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, भारत हमेशा से ही श्रीलंका का अच्छा दोस्त रहा है। किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में किसे भेजा जाए- यह किसी देश का अपना निजी चुनाव है। यदि मेरी जानकारी सही है तो भारतीय प्रधानमंत्री ने पर्थ में भी हुए चोगम में हिस्सा नहीं लिया था।
सिंह इसी महीने के प्रारंभ में कोलंबो में हुए राष्ट्रमंडल देशों के प्रमुखों की बैठक में नहीं गए थे और उन्होंने विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल भेजा था। दरअसल ऐसा तमिलनाडु के राजनीतिक दलों के इस आह्वान के बीच हुआ कि वर्ष 2009 में तमिल विद्रोहियों के साथ लड़ाई के अंतिम चरण में कथित मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर भारत इस सम्मेलन का बहिष्कार करे।
जयसूर्या ने मानवाधिकार उल्लंघन के कथित उल्लंघन की स्वतंत्र जंाच की ब्रिटेन की मंाग पर कहा, बतौर संप्रभु और स्वतंत्र देश, हमारा अपना कानून और न्याय तंत्र है। हम उसके अनुसार काम कर रहे हैं। इस मुद्दे की अंतरराष्ट्रीय जांच की कोई जरूरत नहीं है।
पूर्व क्रिक्रेट राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की सरकार में डाकसेवा उपमंत्री हैं।
भाषा