तीन सितंबर 2004- कांचीपुरम के वरदराजपेरमल मंदिर के प्रबंधक शंकररमन की धारदार हथियार से वार करके हत्या की गई।
11 नवंबर 2004- इस हत्या के मामले में कांची शंकर मठ के शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती को आंध्रप्रदेश के महबूबनगर से दिवाली के दिन गिरफ्तार किया गया।
12 नवंबर 2004- जयेंद्र सरस्वती को न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
10 जनवरी 2005- उच्चतम न्यायालय ने जयेंद्र सरस्वती की जमानत मंजूर की। इस मामले में कनिष्ठ पुजारी विजयेंद्र सरस्वती को गिरफ्तार किया गया।
21 जनवरी 2005- तमिलनाडु पुलिस के विशेष जांच दल ने आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया। सरकारी गवाह बनने वाले सिविल ठेकेदार रवि सुब्रमण्यम पर आरोप नहीं लगाया गया।
10 फरवरी 2005- मद्रास उच्च न्यायालय ने विजयेंद्र सरस्वती की जमानत मंजूर की।
7 मार्च 2005- मद्रास उच्च न्यायालय ने सुब्रमण्यम को धमकाने के आरोपी वरिष्ठ पुजारी की जमानत मंजूर की।
छह मई 2005 - उच्चतम न्यायालय ने मामले को राज्य के बाहर स्थानांतरित करने की जयेंद्र सरस्वती की याचिका के संबंध में तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी किया।
जारी भाषा