मुख्य न्यायाधीश एन वी रमण और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने दिल्ली निवासी अधिवक्ता आनंद कुमार मिश्रा को अपनी शिकायत के साथ निचली अदालत में जाने के लिए कहते हुए याचिका खारिज कर दी।
पीठ ने कहा, याचिका खारिज की जाती है। विस्तृत आदेश बाद मंें दिया जाएगा। पीठ ने कहा कि निषेधाग्या लागू करने को लेकर समान दिशानिर्देश निर्धारित नहीं किया जा सकता।
मिश्रा ने अपनी याचिका में कहा कि निषेधाग्या मनमाने तरीके और दंड प्रक्रिया संहिता में उल्लेखित प्रक्रियाओं का पालन किये बिना लागू की गई थी।
अदालत ने यद्यपि इससे पहले की सुनवाई के दौरान कहा था, आने जाने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है और इसका :दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144: का इस्तेमाल ऐसे ही नहीं किया जा सकता...नहीं तो इससी पवित्रता का हस होगा।
याचिका में उच्चतम न्यायालय के विभिन्न फैसलों का उल्लेख किया गया जिसमें रामलीला मैदान की वह घटना भी शामिल है जिसमें बाबा रामदेव और उनके समर्थकों ने इस मुद्दे पर दिशानिर्देश तय करने की मांग की थी।
याचिका का दिल्ली पुलिस ने इस आधार पर विरोध किया कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के तहत निषेधाग्या लागू करने के लिए दिशानिर्देश तय नहीं किये जा सकते क्योंकि सभी मामले अलग होते हैं और उसमें अलग तथ्य होते हैं।