आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि बैठक में भूमि अधिग्रहण और मुआवजे की व्यवस्था को लेकर तथ्यात्मक उपलब्धियों पर ध्यान दिया जाएगा। परियोजना संचालन समिति की इस दूसरी बैठक का आयोजन यहां सिविल सचिवालय में किया जाएगा।
पहली बैठक का आयोजन 21 मई को ढाका में किया गया था।
केंद्र सरकार यह रेल मार्ग स्थापित करनेे के लिए उत्सुक है क्योंकि इससे बांग्लादेश के रास्ते पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा के बीच रेल संपर्क स्थापित हो जाएगा।
सूत्रों ने कहा कि बांग्लादेश के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संयुक्त सचिव, विकास एवं योजना, सुनील चंद्र पाल करेंगे जबकि भारतीय पक्ष का नेतृत्व विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव आलोक कुमार सिन्हा करेंगे।
भारत और बांग्लादेश ने 21 मई को एक सहमति ग्यापन पर हस्ताक्षर किया था जिसके तहत पहले चरण के काम के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया छह महीने में पूरी कर ली जाएगी।
भारतीय रेलवे का उपक्रम, इरकान परियोजना के सलाहकार के तौर पर काम करेगा जबकि विदेश मंत्रालय परियोजना का खर्च उठाएगा। भारत ने परियोजना के लिए 253 करोड़ रपए मंजूर किए हैं।
15.054 किलोमीटर लंबे रेलमार्ग में भारतीय सीमा में केवल पांच किलोमीटर रेल मार्ग होगा जबकि बाकी बांग्लादेश में होगा। जनवरी 2010 में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत यात्रा के दौरान दोनों देश अखौरा और अगरतला के बीच रेल संपर्क स्थापित करने पर सहमत हुए थे।
भाषा