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उपभोक्ता रुझान में असमान और सुस्त सुधार

श्रम-रोजगार
महेश व्यास /  July 01, 2022

मार्च-अप्रैल 2020 के नुकसानदेह लॉकडाउन को दो साल से अधिक समय हो गया है, लेकिन उपभोक्ता रुझान सूचकांक (आईसीएस) अब भी लॉकडाउन से पहले के अपने स्तर से काफी नीचे है। मई 2022 का आईसीएस फरवरी 2020 के अपने स्तर से 35.7 फीसदी नीचे रहा। परिवार उससे कहीं ज्यादा प्रभावित हुए हैं, जिसे जीडीपी वृद्धि‍ जैसे सामान्य आर्थिक संकेतकों​ से मापा जा सकता है।

सुधार भी असमान रहा है। उद्यमों ने रिकॉर्ड मुनाफा कमाया और सरकार को रिकॉर्ड कर संग्रह से लाभ मिला। मगर परिवारों को अपनी नॉमिनल (बिना महंगाई समयोजित किए) आय महामारी से पहले के स्तरों पर पहुंचाने में कड़ी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। जनवरी 2022 में औसत पारिवारिक आय अपने जनवरी 2020 के स्तर से नॉमिनल आधार पर महज 3.1 फीसदी अधिक थी। इस अवधि के दौरान उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 11.4 फीसदी चढ़ा है। इस तरह वास्तविक पारिवारिक आय लॉकडाउन से पहले के अपने स्तर से काफी कम रही। यह परिवारों पर तगड़ी चोट है।

ऐसे में यह आश्चर्यजनक नहीं है कि उपभोक्ता रुझान लगातार कमजोर बना हुआ है। परिवारों की खुद के सेहतमंद ए‍वं सुखी होने को लेकर धारणा और अपने भविष्य को लेकर अनुमान लॉकडाउन से पहले की तुलना में बदतर बने हुए हैं। उपभोक्ता रुझान सुधर रहा है, लेकिन बहुत सुस्त रफ्तार से। इससे भी बदतर स्थिति यह है कि यह सुधार हाल के महीनों में सुस्त पड़ रहा है। इसके अलावा यह सुधार धनी परिवारों में ही हो रहा है।

जून 2020 में सुधार शुरू होने से लेकर मई 2022 के बीच आईसीएस में औसत मासिक बढ़ोतरी 2.2 फीसदी थी। माध्य मासिक बढ़ोतरी भी 2.2 फीसदी थी। जनवरी और फरवरी 2022 में वृ​द्धि‍ क्रमश: 4 फीसदी और 5 फीसदी रही। इसके बाद यह मार्च में ​फिसलकर 3.7 फीसदी, अप्रैल में 3 फीसदी और मई में 0.8 फीसदी पर आ गई। इससे सुधार सुधार प्रक्रिया के धीमे पड़ने का पता चलता है।

जून 2022 बेहतर रह सकता है, लेकिन इससे रुझान में कोई अहम सुधार नहीं दिखने के आसार हैं। आईसीएस का 30 दिन का चल औसत 26 जून को मई के आखिर के अपने स्तर से 1.3 फीसदी अधिक था। जून के अंतिम चार दिनों में इस स्थिति में कोई बदलाव नहीं आने के आसार हैं। जून 2022 का आईसीएस मई 2022 के स्तर से करीब 1.3 फीसदी अधिक रह सकता है।

यह गिरते वृद्धि‍ रुझान और मई में अत्यधिक कम 0.8 फीसदी फीसदी वृद्धि‍ की तुलना में सुधार की तरह दिखता है। लेकिन जून के चार सप्ताह में नजर आया रुझान ऐसी धारणा को पुष्टि नहीं करते हैं। जून में आईसीएस में ज्यादातर वृद्धि‍ पहले सप्ताह में दर्ज करीब 9 फीसदी बढ़ोतरी की बदौलत रही है। उसके बाद सूचकांक दूसरे सप्ताह में 1 फीसदी लुढ़क गया और तीसरे सप्ताह में 1.3 फीसदी सुधरा। लेकिन 26 जून को समाप्त सप्ताह में आईसीएस में 2.1 फीसदी की अहम गिरावट दर्ज की गई। यह घटती-बढ़ती साप्ताहिक वृद्धि सुधार के तर्क की पुष्टि नहीं करती है।

परिवारों की भविष्य से उम्मीदें कमजोर हैं। शायद इसे समझा भी जा सकता है। ज्यादातर के लिए रोजगार की संभावनाएं बेहतर नहीं हो रही हैं। हाल में अग्निवीर का मामला युवा उम्मीदों के प्रतिकूल था। महंगाई ऊंची बनी हुई है और ब्याज दरें भी बढ़ रही हैं। द​क्षिण-पश्चिम मॉनसून की शुरुआत अच्छी नहीं रही और खरीफ की बुआई में देरी हुई है। इनमें से कुछ भी परिवारों के लिए अच्छा नहीं है, जो वास्तविक अर्थों में अभी लॉकडाउन की चोट से उबरे नहीं हैं।

26 जून तक आईसीएस अपने मई 2022 के स्तर से 1.3 फीसदी ऊपर था, लेकिन परिवारों की मौजूदा स्थिति को दर्शाने वाला मौजूदा आर्थिक स्थिति (आईसीसी) सूचकांक काफी बेहतर रहा है। यह 2.7 फीसदी चढ़ा है। उम्मीदों को दर्शाने वाले उपभोक्ता उम्मीद सूचकांक (आईसीई) में वृद्धि‍ कमजोर रही। इसमें महज 0.4 फीसदी बढ़ोतरी रही।

गरीब परिवारों के उपभोक्ता रुझान में समृद्ध‍ परिवारों की तुलना में काफी धीमा सुधार हुआ है। मई 2022 में आईसीएस फरवरी 2020 में  महामारी से पहले के स्तर के मुकाबले 35.7 फीसदी कम रहा। सालाना एक लाख रुपये से कम आमदनी वाले परिवारों का आईसीएस 46 फीसदी कम था।

आईसीएस में सुधार की रफ्तार सीधे परिवारों की आय के स्तर के अनुपात में थी। सालाना 1 लाख रुपये से 2 लाख रुपये तक की आमदनी वाले परिवारों का आईसीएस 40.4 फीसदी कम था, जबकि सालाना 2 लाख रुपये से 5 लाख रुपये तक की आमदनी वाले परिवारों का आईसीएस 31.2 फीसदी घटा। वहीं सालाना 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये की आमदनी वाले परिवारों के आईसीएस में 30.7 फीसदी गिरावट रही। हर साल 10 लाख रुपये से अधिक आमदनी वाले सर्वोच्च आय वर्ग के परिवारों के आईसीएस में सबसे कम गिरावट रही। इन परिवारों का आईसीएस मई 2022 में फरवरी 2020 की तुलना में 25.2 फीसदी कम रहा।

उपभोक्ता रुझान में आदमनी का यह अंतर मई 2022 में बढ़ गया। मई में कुल आईसीएस में 0.8 फीसदी वृद्धि‍ रही। हालांकि सबसे कम आमदनी वाले वर्ग के परिवारों के रुझान में 8.2 फीसदी और उसके बाद वाले आमदनी वर्ग के परिवारों के रुझान में 3.2 फीसदी गिरावट आई। केवल हर साल 2 लाख रुपये से अधिक आमदनी वाले परिवारों ने मई में आईसीएस में बढ़ोतरी दर्ज की। सालाना 2 लाख रुपये से 5 लाख रुपये तक की आमदनी वाले परिवारों का आईसीएस 2.4 फीसदी बढ़ा।

धनी परिवारों ने मई 2022 में आईसीएस में काफी अधिक वृद्धि‍ दर्ज की। सालाना 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक की आमदनी वाले परिवारों के आईसीएस में 18 फीसदी वृद्धि‍ रही, जबकि सालाना 10 लाख रुपये से अधिक आमदनी वाले परिवारों के आईसीएस में 19.4 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई।

उपभोक्ता रुझान में कमजोरी से निजी अंतिम खपत व्यय में सुधार में देरी हो सकती है और इसके सुधार में असमानता के सुधार की प्रकृति के लिए निहितार्थ हैं।

(लेखक सीएमआईई प्रा​इवेट लिमिटेड के एमडी और सीईओ हैं)

Keyword: लॉकडाउन, उपभोक्ता रुझान सूचकांक, आईसीएस, परिवार, जीडीपी वृद्धि‍,
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