तीन टन के इस हेलीकॉप्टर के विकास का यह कार्यक्रम थलसेना और वायु सेना समेत सशस्त्र सेनाओं के मुख्यालय से परामर्श से चलाया जा रहा है। इसका डिज़ाइन तय किया जा चुका है । 2015 तक हेलीकाप्टर तैयार हो जाने की उम्मीद है।
सीबीआई जांच के कारण विदेश से 197 हेलीकाप्टर खरीदने की योजना में विलम्ब के मद्देनजर देश में ही ऐसे हेलीकाप्टर बनाने का यह कार्यक्रम शुरू किया गया है।
हिंदुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड के अधिकारियों ने यहां कहा, एलयूएच कार्यक्रम अच्छे ढंग से आगे बढ़ रहा है और यह परियोजना सशस्त्र बलों के मुख्यालयों की सहमति से डिज़ाइन फ्रीज के स्तर पर पहंुच गई है।
एकल इंजन वाले इस हेलीकॉप्टर में फ्रांस में बना इंजन लगाया जाएगा। हाल ने इस इंजन का चयन निविदा प्रक्रिया के तहत किया गया है।
यह पूछे जाने पर कि क्या 2015 तक की निर्धारित समयसीमा में इस हेलीकाप्टर के निर्माण का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा तो एचएएल के अधिकारियों ने कहा, हमें सरकार द्वारा तय समय सीमा में यह लक्ष्य हासिल कर लेने का विश्वास है।
इससे पहले थल और वायुसेना को 384 हल्के हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति करने की योजना थी। इसमें से 197 हेलीकॉप्टर विदेश से सीधे खरीदे जाने थे जबकि शेष का निर्माण एचएएल करती। लेकिन विदेश से 197 हेलीकॉप्टर खरीदने का कार्यक्रम रिश्वत के आरोपों के कारण अटक गया है। कुछ गड़बडि़या दिखने के बाद पहली निविदा को रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने रद्द कर दिया।