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अगली पीढ़ी को संपत्ति हस्तांतरित करने में इन गलतियों से बचें

बिंदिशा सारंग /  October 24, 2021

हाल में पंजीकृत निवेश सलाहकार संघ (एआरआईए) ने नामांकन और उत्तराधिकार योजना पर एक श्वेत पत्र जारी किया है। यह नामांकन सुविधाओं की जानकारी देता है। इसमें सभी वित्तीय संपत्तियों में जरूरी अवधारणात्मक बदलावों एवं कानून की प्रक्रिया के उपायों का उल्लेख किया गया है ताकि निवेशकों, उनके परिवारों और उत्तराधिकारियों के जीवन को आसान बनाया जा सके।

एआरआईए ने किसी निवेशक की मृत्यु के बाद उत्तराधिकारियों को परिसंपत्तियों के हस्तांतरण से संबंधित प्रक्रियाओं जैसी खास चुनौतियों से निपटने में निवेशक परिवारोंं और वित्तीय निवेशकों को मदद देने के लिए भी एक पहल शुरू की है।

एआरआईए के चेयरमैन लोवाई नवलाखी ने कहा, 'इस पहल से लोगों को वित्तीय रिकॉर्डों, परिसंपत्तियों के हस्तांतरण और लाभार्थी नामित प्रक्रिया के बारे में सूचना एवं सहायता हासिल करने में मदद मिलेगी।' नामांकन एवं उत्तराधिकार योजना नहीं होने के प्रतिकूल नतीजे हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बड़ी चीज नहीं है, लेकिन छोटी सी गलती ही बड़ा नुकसान कर देती है। ऐसी गलतियों से बचने में मदद के लिए हमने उत्तराधिकार योजना एवं नामांकन करते समय जिन पांच प्रमुख गलतियों के बचा जाना चाहिए, उनकी विशेषज्ञों की एक सूची को सार रूप में पेश किया है।


बाद में या कभी नहीं

परिवार के लिए किसी सदस्य को गंवाने के बाद वित्तीय स्थितियों को सुधारने की कोशिश करना आसान नहीं होता है। अगर कोई उत्तराधिकार योजना नहीं होती है तो उत्तराधिकारियों के लिए मृतक के निवेश को हासिल करना मुश्किल हो जाता है। बिना किसी दिक्कत के मृतक की परिसंपत्तियों के वारिसों को हस्तांतरण के लिए वसीयत जरूरी होती हैं। पीएसएल एडवोकेट्स ऐंड सॉलिसिटर्स में सहायक साझेदार सुविज्ञा अवस्थी ने कहा, 'बहुत से लोगों में वसीयत को लेकर झिझक होती है क्योंकि वे इसकी कीमत और अहमियत को नहीं समझते हैं। वसीयत से अचल संपत्तियों का बंटवारा और उत्तराधिकार आसान बन जाता है। बिना वसीयत के परिसंपत्तियों का हस्तांतरण जटिल काम बन जाता है और परिसंपत्तियों के बंटवारे को लेकर परिवार के सदस्यों में झगड़े हो सकते हैं।' किसी व्यक्ति की सबसे बड़ी गलती उत्तराधिकार योजना नहीं बनाना या इसे बाद के लिए टालना हो सकती है। बीडीओ इंडिया एलएलपी में पार्टनर सूरज मलिक ने कहा, 'आम तौर पर लोग बहुत देर हो जाने तक और गलतफहमी और विवाद शुरू होने तक इसे टालते रहते हैं।' विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर लोग अपने मरने के बारे में नहीं सोचना चाहते हैं या वसीयत बनाने के काम को बोझिल मानते हैं। हालांकि कोविड-19 की पृष्ठभूमि में चीजें बदल रही हैं।


क्या करें

यह बात याद रखें कि ना कुछ के बजाय कुछ भी बेहतर होता है। अगर आपको व्यापक वसीयत बोझिल लगती है तो आजकल ऐसे पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं, जो आपको ऑनलाइन बुनियादी वसीयत बनाने में मदद देंगे। ऑनलाइन वसीयतों के बहुत से फायदे हैं। आपको घर से बाहर नहीं निकलना पड़ता है और इसका खर्च भी वाजिब है। यह इस चीज पर निर्भर करता है कि आप किस तरह की वसीयत चाहते हैं। इसके अलावा आप अब कोई वसीयत बना सकते हैं और जरूरत पडऩे पर इसे बाद में बदल सकते हैं। इसकी लागत कुछ हजार रुपये है, जो इस पर निर्भर है कि आप किसी तरह की वसीयत चुनते हैं। आप मानक, संयुक्त और अल्पवयस्क जैसी कई तरह की वसीयत बनवा सकते हैं। कुछ कारोबार उत्तराधिकार की योजना भी मुहैया कराती हैं।


नामित-कानूनी वारिस के बीच अंतर

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी वसीयत या नामांकनों को लंबी अवधि में अद्यतन न करना भी एक गलती है। वसीयत या नामांकन 'करने और भूलने' जैसी चीज नहीं है। मलिक कहते हैं, 'एक अन्य गलती परिवार के महत्त्वपूर्ण घटनाक्रम के आधार पर इसमें समय-समय पर बदलाव नहीं करना है।' उदाहरण के लिए अगर परिवार में किसी नए सदस्य का जन्म होता है या किसी की मृत्यु होती है तो लाभार्थी या नामांकन में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। जीवन के बड़े घटनाक्रमों या लक्ष्यों में बदलाव और यहां तक कि सार्वजनिक नीति में भी बदलाव होने पर संपत्ति की योजना को अद्यतन बनाना जरूरी है।

अगर कोई नामांकन है तो वित्तीय सेवा प्रदाताओं को कानूनन नामित व्यक्ति को योजनाएं हस्तांतरित करनी पड़ती हैं, बशर्ते कि इस पर अदालत के आदेश से कोई रोक नहीं लगाई गई हो। लेकिन इसमें भी एक शर्त जुड़ी हुई है। नामित के पक्ष में किसी हस्तांतरण से उसे वित्तीय योजना का लाभ हित नहीं मिलता है, जो उत्तराधिकार के लागू कानूनों पर निर्भर करेगा। मृतक के कानूनी वारिसों के लाभ के लिए नामित न्यास में वित्तीय योजनाएं (उनसे प्राप्त धनराशि समेत) रखेगा। इससे चीजों को आसान रखने में मदद मिलती है। एऐंडपी पार्टनर्स में पार्टनर अंकिता सिंह ने कहा, 'हालांकि नामित विवादों को रोकने के लिए महज एक न्यासी या संरक्षक है, लेकिन कानूनी वारिस को ही नामित रखने की सलाह दी जाती है। इस चीज का भी ध्यान रखना चाहिए कि स्पेलिंग और अन्य ब्योरों जैसी चीजें सावधानीपूर्वक भरी जानी चाहिए ताकि बाद में विवादों से बचा जा सके।'


आवश्यक अद्यतन में रहें चुस्त

हमेशा आवश्यक अद्यतन में चुस्त रहना अच्छा होता है। लेकिन यह कहना जितना आसान है, उतना करना कठिन है। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि छह महीनों में कम से कम एक बार अपने निवेश पोर्टफोलियो की समीक्षा करना हमेशा अच्छा होता है। जब आप अपने वित्तीय पोर्टफोलियो की समीक्षा करते हैं तो नामांकन या संपत्ति योजना की समीक्षा करना अच्छा होता है। इसलिए वित्तीय सलाहकार सुझाते हैं कि अपनी वर्षगांठ जैसी तारीखों पर समीक्षा की जानी चाहिए।


समझदारी से चुनें

इस मामले में अनजान से जानकार बेहतर होता है। टीएएस लॉ में पार्टनर उत्सव त्रिवेदी ने कहा, 'उत्ताधिकार योजना बनाने वाले व्यक्ति को नामांकन में यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि आपकी जिम्मेदारी कौन पूरी करेगा क्योंकि उत्तराधिकार योजना केवल तभी हासिल की जा सकती है, जब यह पूरी कर्मठता और सोच-समझकर की जाए।'


भरोसेमंद व्यक्ति हो प्रबंधक

परिवार के किसी भरोसेमंद व्यक्ति को वसीयत का निर्वाहक या प्रबंधक रखें। आम तौर पर जब किसी तीसरे व्यक्ति को प्रबंधक के रूप में नामित किया जाता है तो शायद वह परिवार के सदस्यों के सबसे बेहतर हित में काम न करे।


दस्तावेजों को पंजीकृत न कराना

जिन दस्तावेजों पर कानून में मुहर या पंजीकरण अनिवार्य है, वह उसी तरह किया जाना चाहिए। अवस्थी कहते हैं, 'लोगों में यह गलत धारणा हो सकती है कि बाद में कभी दस्तावेज को पंजीकृत कराना पर्याप्त होगा। हालांकि भविष्य हमेशा अनिश्चित होता है। यह बहुत अहम है कि दस्तावेज ठीक से पंजीकृत, मुहरशुदा हों और उनकी कई प्रतियां उपलब्ध हों।' हालांकि जब वसीयत की बात आती है तो यह सही है कि इसका पंजीकरण अधिनियम, 1908 के तहत पंजीकरण अनिवार्य नहीं है और ठीक से बनाई गई गैर-पंजीकृत वसीयत भी कानून के तहत वैध है। लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। अगर वसीयत पंजीकृत नहीं है तो विवाद के आसार बढ़ जाते हैं।

मिगलानी वर्मा ऐंड कंपनी (एडवोकेट्स, सॉलिसिटर्स ऐंड कंसल्टेंट्स) में पार्टनर ज्योतिका जैन ने कहा, 'कानूनी वारिस वसीयत पर सवाल खड़े कर सकते हैं, लेकिन किसी पंजीकृत वसीयत के कानून के तहत वैध होने के बहुत अधिक आसार होते हैं। इसके अलावा अगर व्यक्ति वसीयत में कुछ अतिरिक्त चीजें जोडऩा चाहता है तो यह काम कोडिसिल से आसानी से किया जा सकता है।' हालांकि जिस मामले में एक से अधिक वसीयत हैं, उसमें बाद की वसीयत को प्राथमिकता मिलेगी।

आप क्या कर सकते हैं : यह ज्यादा बेहतर है कि कोई वसीयत दो गवाहों की मौजूदगी में बनाई जाए और इसे पंजीकृत कराया जाए।


स्पष्ट ब्योरा

विक्टोरियम लीगलिस-एडवोकेट्स ऐंड सॉलिसिटर्स में प्रबंध साझेदार आदित्य चोपड़ा ने कहा, 'उत्तराधिकार योजना परिवार की जरूरतों और लंबी अवधि के उद्देश्यों के मुताबिक होनी चाहिए। लेकिन बहुत से परिवार इसकी अहमियत नहीं समझ पाते हैं और मनमाने तरीके से बदलाव के चरण में प्रवेश करते हैं।'

किसी भी उत्तराधिकार योजना के वांछित नतीजे उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करते हैं। यह केवल तभी संभव है, जब किसी सफल क्रियान्वयन के लिए आवश्यक मानकों पर आधारित उचित ढांचा हो। चोपड़ा कहते हैं, 'सबसे अहम पहलू यह है कि उत्तराधिकार योजना के बारे में परिवार के सदस्यों को ठीक से बताया जाए। अमूमन परिसंपत्ति पर कब्जे वाला व्यक्ति परिवार के सदस्यों की सक्रिय भागीदारी की कोशिश नहीं करता है और उनकी जरूरतों को नहीं समझ पाता है, जिससे यह प्रक्रिया बेकार साबित हो सकती है।' व्यक्ति को यह भी समझना चाहिए कि विचारों में मतभेद और दंभ की वजह से कानूनी झगड़े होते हैं। उचित उत्तराधिकार योजना से अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचने में मदद मिल सकती है।

मिगलानी वर्मा ऐंड कंपनी के जैन कहते हैं, 'जब किसी परिवार का सदस्य वसीयत नहीं छोड़ता है तो संपत्ति का बंटवारा हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम या भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम या मुस्लिमों के पर्सनल लॉ के तहत होगा।'

Keyword: अगली पीढ़ी, संपत्ति, एआरआईए, नामांकन, उत्तराधिकार योजना, वित्तीय रिकॉर्ड,
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