कल शाम को आयोजित थिंकफेस्ट में बातचीत के दौरान चोपड़ा ने कहा, उनकी कहानी मेरी कहानी के जैसी ही है। मैं जब इस इंडस्ट्री में आई थी तो मैंने भी संघर्ष किया था और मैं भी अकेले रोई थी। यह मूल रूप से हर उस लड़की की कहानी है, जिसका कोई सपना है।
यह फिल्म मणिपुर के भूमिहीन किसान के घर जन्मी उस मैरी की परीक्षाओं और उनकी पीड़ाओं की कहानी है, जिसने एक मुक्केबाज के रूप में अपना एक मुकाम बनाया।
प्रियंका ने कहा कि भारत में महिला खिलाडि़यों की कहानी फिल्मों के माध्यम से कभी नहीं बताई गई। प्रियंका ने कहा, मैं असली मैरी की कहानी सुनाना चाहती हूं।
मुक्केबाज होने के बावजूद मैरी एक आम लड़की भी है, जो अपने अपने बॉक्सिंग ग्लव्ज़ के नीचे अपने नाखूनों पर नाखून पॉलिश लगाती है।
प्रियंका ने कहा, उन्हें गाना, फिल्में देखना और हर वह चीज पसंद है जो किसी लड़की को पसंद होती है।
इस बातचीत के दौरान मैरी कॉम भी उपस्थित थीं। उन्होंने बताया कि किस तरह दिल्ली समेत देश के अन्य हिस्सों में पूर्वोत्तर की लड़कियों के साथ नेपालियों या गैर-भारतीयों की तरह व्यवहार किया जाता है।
उन्होंने कहा कि मणिपुर में स्थिति भयावह हो रही है।
अर्जुन पुरस्कार विजेता इस खिलाड़ी ने कहा, मुझे अपने सुरक्षाकर्मियों को साथ लिए बिना बाहर जाने में डर लगता है। मेरे विभाग :पुलिस: ने मुझे सुरक्षा दे रखी है। वर्ना सिर्फ मैं ही नहीं, मेरा परिवार भी सुरक्षित न होता।
भाषा