शीर्ष अदालत के वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी एस सिंघवी ने भी प्रधान न्यायाधीश की राय का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि लाखों गरीब लोगों के लिए न्याय अब भी भ्रम बना हुआ है।
वे राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे।
न्यायमूर्ति सदाशिवम ने कहा कि ज्यादातर लोगों का अब भी मानना है कि कानूनी कार्यवाही में वादकारों के हित पर गौर नहीं किया जाता है और मनोवृत्ति को बदलने और जागरूकता पैदा करने के लिए कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, हमारे जनांकिकीय लाभांश के बड़े हिस्से के लिए न्याय अब भी अबूझ शब्द बना हुआ है क्योंकि आम आदमी की धारणा में हमारी अदालतें कानून का उपयोग सिर्फ कानून की खातिर कर रही हैं, न्याय के लिए नहीं। यह ज्यादातर भारतीयों का मानना है कि कानूनी कार्यवाही के तूफान में वादकारों के हितों पर गौर नहीं किया जाता।
न्यायमूर्ति सिंघवी ने कहा कि यह समय इस बात पर विचार करने का है कि क्या विगत 65 वर्षों में हम लोगों को न्याय प्रदान करने का लक्ष्य हासिल करने में सक्षम रहे हैं और क्या हमने ऐसा वातावरण बनाया है जहां सबके लिए समान अवसर और लोगों के लिये प्रतिष्ठा हो।
जारी :भाषा