बिजनेस स्टैंडर्ड - वैश्विक संकट के दौर में वास्तविक राजनेता
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, September 28, 2021 12:54 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

वैश्विक संकट के दौर में वास्तविक राजनेता

नौशाद फोर्ब्स /  August 25, 2021

कोविड महामारी से बेहतर तरीके से कौन निपटा? सन 2020 के आरंभ से ही संक्रमण का प्रसार रोकने के लिए लॉकडाउन, मास्क और शारीरिक दूरी आदि हमारे रोज के जीवन का हिस्सा बन गए। प्रभावी उपचार से मृत्यु दर कम की जा सकती है। ज्यादा संभावना यही है कि टीकाकरण ही महामारी से निजात दिलाए। संक्रमण, मौत और टीकाकरण के तीन मानकों के आधार पर ही विभिन्न देशों की तुलना हो सकती है। इस आलेख में शामिल आंकड़े 1 अगस्त, 2021 तक प्रति 10 लाख आबादी पर हैं। हमारा लक्ष्य यही होना चाहिए कि सीमित स्वीकार्य जोखिम के साथ हम हालात सामान्य कर सकें।

मृत्यु दर के मामले में विभिन्न देशों के आंकड़े काफी अलग हैं। ऑस्ट्रेलिया में जहां मृत्यु दर 36 प्रति 10 लाख है, वहीं ताइवान में यह 33 है। अमेरिका (1,850), ब्राजील (2,620) और ब्रिटेन(1,915) से यह बहुत बेहतर है। टीकाकरण के मामले में भी प्रदर्शन एकदम अलग है। अमेरिका, ब्रिटेन, इजरायल, संयुक्त अरब अमीरात और अब यूरोप के ज्यादातर हिस्से ने अपनी आधी आबादी को टीका लगा दिया है। पूर्वी और दक्षिण पूर्वी एशिया में टीकाकरण अपेक्षित स्तर पर नहीं हो रहा है। जिन देशों में टीकाकरण अधिक हुआ है वहां मृत्यु दर भी अधिक है। कम मृत्यु दर वाले बहुत कम स्थानों पर टीकाकरण की दर अधिक है।

यहां से कहां? उच्च मृत्यु दर वाले देश को क्या करना चाहिए? उन्हें व्यापक टीकाकरण करना चाहिए। भारत में इसे सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता होना चाहिए। सरकार के सबसे काबिल लोगों को टीकाकरण अभियान चलाना चाहिए। टीकों के समुचित ठेके दिए जाने चाहिए और सरकार के उच्चतम स्तर पर रोज प्रगति की समीक्षा होनी चाहिए। दूसरी लहर जैसी तबाही से बचने का यही एक तरीका है। सरकार ने बार-बार कहा है कि इस वर्ष के अंत तक टीकाकरण हो जाएगा लेकिन हम अभी वांछित स्तर के आधे पर हैं। 

कम मृत्यु दर वाले देश क्या करें? उन्हें भी व्यापक टीकाकरण करना चाहिए। ऑस्कर वाइल्ड ने कहा था कि इस दुनिया के बाद एक और दुनिया थी और तब न्यूजीलैंड था। लेकिन न्यूजीलैंड भी शेष विश्व के साथ दोबारा कदम मिलाना चाहता है। ऑस्ट्रेलिया को 2032 के ओलिंपिक ब्रिस्बेन में आयोजित करने की बोली हासिल हुई है। जब मैंने यह खबर देखी तो मेरी टिप्पणी थी कि काश तब तक सब सामान्य हो जाए। ऐसे अमीर और कम आबादी वाले देशों में जहां स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर है, टीकों की केवल 18 और 24 प्रतिशत खुराक शर्मनाक है।

इस मामले में सिंगापुर अपवाद है। उसने संक्रमण और मौत के मामलों को नियंत्रित किया और प्रभावी ढंग से टीकाकरण भी किया। उसकी आबादी के 65 प्रतिशत हिस्से को टीका लग चुका है। उसके तीन मंत्रियों ने जुलाई में कहा था कि हमें कोविड के साथ जीना और उसका प्रबंधन करना होगा, बजाय कि उसे नियंत्रित करने के। उन्होंने कहा कि संक्रमण के बजाय मौत और गहन चिकित्सा सुविधाओं की पड़ताल करें। दो सप्ताह बाद संक्रमण बढऩे पर गतिविधियों पर दोबारा प्रतिबंध लगा दिए गए। उच्च टीकाकरण के साथ संक्रमण रोकने में चीन भी अपवाद है लेकिन दुनिया के सामने कोविड जैसी स्वास्थ्य चुनौती पेश करने के कारण मैं उसे किसी तरह का आदर्श नहीं मान पा रहा। 

वैश्विक नेतृत्व की जरूरत : ऐसे में महामारी का बेहतर प्रबंधन किसने किया इसका अब तक के हालात पर मेरा जवाब है कि किसी ने नहीं। ऐसा क्या किया जाए कि इस वर्ष के अंत तक यह उत्तर बदल जाए? तीन काम हो सकते हैं: टीकाकरण, हालात सामान्य बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और देश के नागरिकों को साथ लेकर चलने के लिए जरूरी नेतृत्व। 

टीकाकरण: हम तभी सुरक्षित होंगे जब सभी सुरक्षित होंगे। टीकाकरण में जितनी देरी होगी, वायरस के स्वरूप बदलने और प्रतिरक्षा तंत्र को भेदने की आश्ंाका उतनी अधिक होगी। द इकनॉमिस्ट ने सही कहा कि जी 7 अपनी हालिया बैठक में यह आर्थिक और नैतिक संकेत देने में नाकाम रहा कि दुनिया के सभी 7 अरब लोगों का टीकाकरण किया जाएगा। टीकाकरण का आर्थिक प्रतिफल जबरदस्त है।

भारत के सभी लोगों के टीकाकरण की लागत केवल अप्रैल 2020 में जीएसटी में आई गिरावट के आधे के बराबर होगी। जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने जापान, ऑस्टे्रलिया और भारत के नेताओं को मार्च में क्वाड शिखर बैठक के लिए आमंत्रित किया तो एक अहम पहल थी एशिया के बड़े हिस्से का टीकाकरण। अमेरिका टीकों की तकनीक देगा, भारत बनाएगा और जापान तथा ऑस्ट्रेलिया भुगतान करेंगे। तब से इस बारे में कोई प्रगति नहीं दिखी। तीन महीने पहले एक वरिष्ठ अधिकारी खासतौर पर हमारे लिए टीके हासिल करने अमेरिका गए थे, उसका क्या हुआ? चीजों में समय लगता है लेकिन हम जितनी देरी करेंगे, जोखिम उतना बढ़ेगा।

समन्वित खुलापन लाने के लिए कई कदम जरूरी: शुरुआत सहमति से यात्रा मानक तय करने से होनी चाहिए। हर देश की अपनी जरूरतें हैं। टीका पासपोर्ट को लेकर सबसे अधिक सहमति नजर आ रही है। भारत इस समझदारी भरे विचार का विरोध क्यों कर रहा है? कोलंबिया और थाईलैंड से अमेरिका जाया जा सकता है लेकिन भारत या यूरोप से नहीं जबकि संक्रमण की मौजूदा दर इसके उलट संकेत करती है। उड़ानों पर प्रतिबंध समाप्त होना चाहिए ताकि विमानन कंपनियां तय कर सकें कि कहां कितनी क्षमता से उड़ान भरनी है।

भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में क्यों शामिल है जहां हवाई यातायात सामान्य नहीं हुआ है। यह स्वास्थ्यगत कारणों से है या एयर इंडिया को प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए? ब्रिटेन में 60 फीसदी लोग गतिविधियां शुरू करने के खिलाफ थे। उसे खोला गया लेकिन केवल घरेलू स्तर पर। यानी वह यूरोप की सामान्य गतिविधियों से कदमताल करने की कोशिश में है। सिंगापुर को भी चाहिए कि वह अपने मंत्रियों के गत माह के प्रस्ताव को नीतियों में ढाले। यदि सिंगापुर में रहने वाले प्रवासी वहां से दूसरे अनुकूल स्थानों पर चले गए तो  उसकी समृद्धि पर बुरा असर होगा।

शासन कला: मेरी दृष्टि में स्टेट्समैन एक ऐसा राजनेता होता है जो सही कदम उठाता है, भले ही वह तात्कालिक रूप से लोकप्रिय न हो। जब विभिन्न देशों के समक्ष संकट आता है, तो जरूरत होती है कि उनके नेता देश हित में ऐसे काम करें जो आगे चलकर सही साबित हों। वैश्विक महामारी जैसे अंतरराष्ट्रीय संकट के समय नेताओं को मानवता के व्यापक हित में काम करना चाहिए।

(लेखक फोर्ब्स मार्शल के सह-चेयरमैन, सीआईआई के पूर्व अध्यक्ष और सेंटर फॉर टेक्नोलॉजी इनोवेशन ऐंड इकनॉमिक रिसर्च के चेयरमैन हैं) 

Keyword: covid-19, coronavirus, vaccine, vaccination, bharat biotech, covaxine, health ministry, vaccine plant, vaccination centre, अमेरिका, ब्रिटेन, इजरायल, संयुक्त अरब अमीरात, यूरो,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या रोजगार के मोर्चे पर आगे बेहतर होंगे हालात?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.