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किसानों के रोष का नहीं होगा चुनावी असर!

नितिन कुमार /  March 10, 2021

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। इस क्षेत्र में दबदबा रखने वाले समुदायों में जाट प्रमुख हैं और इस समुदाय में तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ  पार्टी से रोष बढ़ रहा है और खाप अपने नेताओं का बहिष्कार कर रही हैं। मुसलमानों के साथ ही जाट भी अपने नेताओं को सबक सिखाने के लिए भाजपा के खिलाफ  मतदान करने के लिए तैयार दिखाई दे रहे हैं और यह दावा उन विपक्षी दलों का है जिन्हें पिछले सात सालों में चुनावी मात खानी पड़ी है।

जिन महापंचायतों को कांग्रेस की नेता प्रियंका गांधी वाड्रा और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के जयंत चौधरी संबोधित कर रहे हैं वहां भारी भीड़ देखने को मिल रही हैं। उन्हें उम्मीद है कि यह भीड़ वोटों में भी तब्दील हो जाएगी। हालांकि फिलहाल इसमें कोई ठोस बात नहीं दिखती हैं। भैसा (मवाना) में जयंत चौधरी की रैली में शामिल किसान योगराज सिंह लोहार कहते हैं, 'उनके (मुसलमानों) साथ-साथ हम भी वोट नहीं देंगे और हम उनके पास भी नहीं जाएंगे।' जिन्होंने इस महापंचायत में हिस्सा लिया लगभग सभी एक तरह की बात दोहरा रहे हैं और उन लोगों के बीच भी इसी बात को लेकर चर्चा है जो पिछले 100 दिनों से नियमित रूप से इस तरह के विरोध प्रदर्शनों में भाग ले रहे हैं।

हालांकि कई लोगों के लिए 2013 के मुजफ्फ रनगर दंगों के जख्म आज भी ताजा हैं। रैली में शामिल 60 वर्षीय किसान विरासत खान ने कहा कि मुसलमान भी जाटों का साथ नहीं देना चाहते हैं लेकिन मोदी (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) को हराना ही होगा। हालांकि कई जाट नेताओं और किसानों ने कहा कि वे अप्रैल में होने वाले आगामी पंचायत चुनाव में भाजपा के खिलाफ  मतदान करेंगे लेकिन वे अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में विपक्षी दलों को अपना समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध नहीं दिखते हैं। वे सभी चाहते हैं कि केंद्र कृषि कानूनों के मुद्दे पर अड़ी न रहे या उन्हें एक ऐसा प्रस्ताव दे जो उन्हें स्वीकार्य हो।  मुजफ्फ रनगर के एक गांव में 40 बीघा जमीन में खेती करने वाले किसान तेजपाल सिंह लाटियां ने कहा, 'हम सरकार के खिलाफ  नहीं हैं लेकिन सरकार को किसानों की बात सुननी चाहिए और इन कानूनों को वापस लेना चाहिए।' जिले के सलाह खेरी गांव के किसान धर्मेंद्र सिंह सरकार से गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाने, समय पर बकाया राशि दिलाने और कृषि कानूनों को समाप्त करने की मांग करते हैं। यह पूछे जाने पर कि वह विधानसभा चुनाव में किसे वोट देंगे, वह झट से रालोद का नाम लेते हैं लेकिन फिर मुस्कुराते हुए जवाब में संशोधन करते हुए भाजपा का पक्ष लेते हैं, बशर्ते किसानों का विरोध खत्म हो जाए।

विशेषज्ञ भी कुछ इसी तरह के विचार जाहिर करते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के खिलाफ  गुस्से के बावजूद विपक्षी दल केवल कुछ ही सीटें मुश्किल से जीत सकेंगे। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर और लोकनीति राज्य समन्वयक (पश्चिमी उत्तर प्रदेश) मिर्जा अस्मेर बेग कहते हैं कि रालोद और कांग्रेस गिनती करने लायक भी पार्टी नहीं बची है। वह कहते हैं, 'इन पार्टी के काडर जमीनी स्तर पर नहीं दिखते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री चरण सिंह की विरासत की वजह से रालोद को दो-तीन सीटें मिल सकती हैं लेकिन कांग्रेस के लिए कोई उम्मीद नहीं है।' भाजपा को हराने के लिए जाटों और मुसलमानों के एक साथ आने के सवाल पर बेग ने ऐसे दावों को महज एक उम्मीद और इच्छा वाली सोच करार दिया और कहा, 'जाट-मुसलमानों का गठजोड़ भाजपा की सांप्रदायिक सुनामी को रोकने के लिहाज से बेहद कमजोर है।' पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, 'अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को आधी सीटों के लिए भी अच्छे उम्मीदवार नहीं मिलेंगे।' भाजपा के लिए यह चुनौती तात्कालिक है। इससे पार्टी को इस क्षेत्र के पंचायत चुनाव में करारा झटका लग सकता है। फिलहाल इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकलने की वजह से किसानों का विरोध प्रदर्शन भाजपा के लिए परिणाम को प्रभावित कर सकता है।

ऐसा नहीं है कि भाजपा नाराज जाटों को लुभाने के लिए कोशिश नहीं कर रही है। मुजफ्फ रनगर से सांसद और भाजपा में प्रमुख जाट नेता केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान को पहले से ही किसान नेताओं और अन्य लोगों से मिलने की जिम्मेदारी सौंपी गई है यह आश्वस्त कराने की कोशिश की जा रही है कि नए कृषि कानून किसान विरोधी नहीं हैं।

खापों द्वारा भाजपा नेताओं के बहिष्कार करने के बारे में पूछे जाने पर बालियान ने कहा, 'मैं दोहरी भूमिका में हूं। मैं एक खाप सदस्य होने के साथ ही भाजपा का मंत्री भी हूं। मैं कृषि कानूनों के लिए सरकार के साथ खड़ा हूं।' वह इस क्षेत्र में किसानों के साथ बैठकें कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर बालियान खाप नेता नरेश टिकैत जो किसानों के विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष भी हैं उनकी पत्नी मंजू बालियान ने कृषि कानूनों का समर्थन करने के लिए पंचायतों को बुलाने के लिए भाजपा की आलोचना की है। उन्होंने कहा, 'उन्हें (संजीव बालियान) इस समय गांवों में जाने से बचना चाहिए।' इस चेतावनी की एक वजह यह है कि मंत्री को किसानों के गुस्से का सामना करना पड़ सकता है। जाट एकता के प्रतीक सर्व खाप पंचायत के प्रमुख केंद्र शाऊराम में हाल ही में हुई झड़प के दौरान चार लोग घायल हो गए थे जहां वह बहिष्कार के आह्वान को नजरअंदाज करते हुए एक स्थानीय व्यक्ति के निधन होने पर उन्हें श्रद्धांजलि देने गए थे। शाऊराम के रहने वाले योगेश बालियान ने कहा, 'भाई की तरह बन कर आएं तो ठीक है भाजपा नेता बन कर न आएं।' लेकिन संजीव बालियान को इस बात का भरोसा है कि राज्य में चुनाव के वक्त तक इन किसानों का गुस्सा कम हो जाएगा। वह कहते हैं, 'नाराजगी है पर हम मना लेंगे।' साथ ही वह इस बात पर भी जोर देते हैं कि आंदोलन को तथ्यों के बजाय भावनाओं के आधार पर चलाया जा रहा है।

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