सिब्बल ने पटनायक को भेजे पत्र में कहा था कि उनकी सिफारिशें अधूरी हैं और उच्च न्यायालय की कोई पीठ स्थापित करने की सिफारिश पर राज्य के मुख्य न्यायाधीश की मुहर जरूरी है।
पटनायक ने 28 सितंबर को भेजे पत्र में सिब्बल से उच्च न्यायालय की पीठें स्थापित करने के लिए कदम उठाने की अपील की थी। हालांकि पटनायक ने प्रस्तावित पीठों के लिए स्थान नहीं बताया था।
उच्च न्यायालय के वकीलों ने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने मुख्य न्यायाधीश से चर्चा किए बगैर एकतरफा सिफारिश कर दी थी।
एसोसिएशन के सचिव जन्मेजय कटाकिया ने कहा, यह :पटनायक की सिफारिश: असंवैधानिक एवं उच्चतम न्यायालय की व्यवस्था के खिलाफ है क्योंकि यह सिफारिश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श कर नहीं की गयी थी।