उन्होंने कहा, ऐसा प्रतीत होता है कि मंत्रियों को बताया गया कि राष्ट्रपति को अध्यादेश पर हस्ताक्षर करने पर आपत्ति है। इससे मंत्री सजग हो गये। राष्ट्रपति यदि हस्ताक्षर के बिना अध्यादेश को वापस लौटाते तो यह सरकार के लिए बड़ा झटका होता।
बकवास तथा अध्यादेश को फाड़कर फेंक देना चाहिए जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने के लिए राहुल गांधी को आड़े हाथ लेते उन्होंने कहा कि यदि वह सरलता से यह कह देते कि सरकार के निर्णय की समीक्षा किये जाने की जरूरत है तो भी उनका मकसद पूर हो जाता।
आडवाणी ने कहा कि :रिपीट: कहा कि राहुल ने इस बात की एक भी दलील नहीं दी कि अध्यादेश गलत क्यों है। उन्होंने हैरत जतायी कि उनकी बात में ऐसा क्या था कि जिसको लेकर प्रधानमंत्री ने अपने कैबिनेट के साथ विचार किया होगा।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के हरकत में हरकत में आने कहा, संभवत: सोनियाजी ने यह सोचा हो कि इस मकसद के लिए राहुल का इस्तेमाल कर कुछ नुकसान भरपाई की जाये।
भाषा