यहां आज तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय चमड़ा मेला शुरू होने पर एक पशु अधिकार संगठन ने चमड़ा तैयार करने के दौरान पशुओं के साथ होने वाली क्रूरता के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए विरोध प्रदर्शन शुरू किया।
पीपुल फार द इथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनीमल्स के एक कार्यकर्ता ने कहा, हर कोई किसी न किसी का बच्चा है : अतएव चमड़ा मुक्त बनिए।
चमड़ा उद्योग की क्रूरता के खिलाफ पेटा की भारतीय इकाई के अभियान की यह नवीनतम कड़ी है और इसका उद्देश्य इस बारे में जागरूक बनाना है कि जिन पशुओं की त्वचा को कोट, जूते, बैग और अन्य उत्पादों के लिए ढाला जातव है, उन्हें किस पीड़ा से गुजरना पड़ता है।
पेटा इंडिया अभियान के समन्वयक चानी सिंह ने कहा, जो लोग मानव शिशु की त्वचा से बने कोट खरीदने का कभी विचार भी नहीं कर सकते, उन्हें गाय एवं अन्य पशुओं की त्वचा से बने कोट नहीं पहनाना चाहिए और उन्हें यह विचार करना चाहिए कि पशुओं को भयंकर यातना से गुजरना पड़ता है और उन्हें मार डाला जाता है।
पेटा का कहना है कि चमड़ा के लिए उपयोग में लाए जाने वाले पशु जैसे गायें और भैंसे वाहनों में ठसाठस भर दिए जाते हैं और ऐसे में उनकी हड्डियां टूट जाती हैं। जो पशु जिंदा बच जाते हैं उनका गला काट डाला जाता है और उनका अंगभंग कर दिया जाता है।