बिजनेस स्टैंडर्ड - आरबीआई देगा 28 हजार करोड़ का अंतरिम लाभांश
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आरबीआई देगा 28 हजार करोड़ का अंतरिम लाभांश

सोमेश झा और अरूप रॉयचौधरी / नई दिल्ली 02 18, 2019

निदेशक मंडल की बैठक में हुआ फैसला

राजकोषीय घाटे का लक्ष्य हासिल करने में मिलेगी मदद
ब्याज दर में कटौती के लिए बैंक प्रमुखों से मिलेंगे दास
जारी रहेगी बैंकों के विलय और अधिग्रहण की मुहिम

बिजनेस स्टैंडर्ड आरबीआई देगा 28 हजार करोड़ का अंतरिम लाभांशभारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इस वित्त वर्ष में सरकार को 28,000 करोड़ रुपये का अंतरिम लाभांश देने का फैसला किया है। केंद्रीय बैंक के निदेशक मंडल की आज हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया।  बैंक ने एक बयान में कहा कि सीमित ऑडिट और वर्तमान आर्थिक पूंजी मसौदे की समीक्षा के बाद निदेशक मंडल ने 31 दिसंबर, 2018 को समाप्त छमाही के लिए अंतरिम अधिशेष के रूप में केंद्र सरकार को 28,000 करोड़ रुपये हस्तांतरित करने का फैसला किया है। बैठक में आरबीआई बोर्ड ने मौजूदा आर्थिक स्थिति, वैश्विक और घरेलू चुनौतियों और बैंक के कामकाज से जुड़े अन्य विशेष क्षेत्रों की भी समीक्षा की गई। 

आरबीआई से मिलने वाले अंतरिम लाभांश से केंद्र को राजकोषीय घाटे के अपने संशोधित लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलेगी। 2018-19 में राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.4 फीसदी रखने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल द्वारा एक फरवरी को पेश 2019-20 के अंतरिम बजट में आरबीआई से 28,000 करोड़ रुपये अंतरिम लाभांश मिलने की बात कही थी। अंतरिम बजट में 2018-19 के दौरान आरबीआई, राष्ट्रीय बैंकों और वित्तीय संस्थानों से मिलने वाले लाभांश को संशोधित कर 54,817 करोड़ रुपये से 74,140 करोड़ रुपये कर दिया गया था। 

यह लगातार दूसरा साल है जब आरबीआई ने अपना अंतरिम अधिशेष सरकार को हस्तांतरित किया है। आरबीआई में वित्त वर्ष जुलाई से जून की अवधि में होता है और अमूमन वह अगस्त में खाता बंद होने के बाद ही सरकार को लाभांश देता है। आरबीआई ने अंतरिम लाभांश की रकम तय करने के लिए पहली बार अपने छमाही खातों का सांविधिक ऑडिट कराया है। पिछले साल अगस्त में सरकार को केंद्र बैंक से 40,000 करोड़ रुपये का लाभांश मिला था। इस तरह सरकार को अधिशेष के रूप में केंद्रीय बैंक 2018-19 से 68,000 करोड़ रुपये मिलेंगे। 

आरबीआई ने 2017-18 में केंद्र के अनुरोध पर उसे पहली बार 10,000 करोड़ रुपये का अंतरिम लाभांश दिया था। 2017-18 में सरकार को आरबीआई की ओर से 50,000 करोड़ रुपये लाभांश मिला था। 2016-17 में यह राशि 65,876 करोड़ रुपये थी। 2019-20 में सरकार केंद्रीय बैंक से 69,000 करोड़ रुपये का लाभांश मांग रही है। सरकार ने इस दौरान आरबीआई, राष्ट्रीय बैंकों और वित्तीय संस्थानों से 82,911 करोड़ रुपये का संयुक्त लाभांश हासिल करने का लक्ष्य रखा है। बैठक के बाद आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि रीपो दर में कटौती का फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए वह 21 फरवरी को सरकारी और निजी बैंकों के प्रमुखों के साथ बैठक करेंगे।

उन्होंने कहा, 'केंद्रीय बैंक के दरों में कटौती के बाद इसका फायदा उपभोक्ताओं को मिलना बहुत जरूरी है।' आरबीआई ने इस महीने की शुरुआत में नीतिगत दरों में 0.25 फीसदी की कटौती की थी।  वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सरकार सरकारी बैंकों के विलय और अधिग्रहण की संभावनाएं तलाशना जारी रखेगी।  उन्होंने कहा, 'हमारे पास एसबीआई के विलय का अनुभव है और एक और विलय हो रहा है। भारत को गिने-चुने और बड़े आकार वाले बैंकों की जरूरत है।' 

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